जमुई पीड़ित परिवार की बिना ब्लर फोटो शेयर करने पर विवाद, वीडियो में जाने CM सम्राट चौधरी ने पोस्ट डिलीट किया; तेजस्वी ने मांगी कार्रवाई
बिहार के जमुई में सड़क पर बदसलूकी की पीड़ित बच्ची और उसके परिवार की तस्वीर सोशल मीडिया पर शेयर किए जाने को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के आधिकारिक एक्स हैंडल से गुरुवार को पीड़ित परिवार के साथ मुलाकात की तस्वीरें पोस्ट की गईं। आरोप है कि तस्वीर में पीड़ित परिवार के सदस्यों के चेहरे बिना ब्लर किए दिखाई दे रहे थे। पोस्ट किए जाने के करीब 15 मिनट बाद इसे एक्स हैंडल से हटा दिया गया। हालांकि, तब तक पोस्ट का स्क्रीनशॉट सोशल मीडिया पर शेयर होने लगा। मामले को लेकर विपक्षी नेताओं ने सवाल उठाते हुए कार्रवाई की मांग की है।
मुख्यमंत्री ने परिवार से की थी मुलाकात
जमुई मामले में पीड़ित परिवार ने गुरुवार को मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से मुलाकात की थी। मुलाकात के बाद मुख्यमंत्री के आधिकारिक एक्स हैंडल से एक पोस्ट किया गया।पोस्ट में कहा गया कि लोकसेवक आवास में जमुई की पीड़ित बच्ची और उसके परिवार से मुलाकात की गई। बच्ची को निर्भय होकर आगे बढ़ने और परिवार को जल्द न्याय का भरोसा दिलाने की बात कही गई। पोस्ट में यह भी कहा गया कि परिवार ने पुलिस की कार्रवाई पर संतोष जताया है।मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से किए गए पोस्ट में सभी आरोपियों के खिलाफ स्पीडी ट्रायल के जरिए एक महीने के भीतर कड़ी सजा सुनिश्चित करने की बात भी कही गई थी।
बिना ब्लर वाली तस्वीर को लेकर उठे सवाल
इसी पोस्ट के साथ मुख्यमंत्री और पीड़ित परिवार के सदस्यों की तस्वीरें शेयर की गईं। आरोप है कि तस्वीर में पीड़ित बच्ची और उसके परिजनों के चेहरे ब्लर नहीं किए गए थे।पोस्ट हटाए जाने से पहले सोशल मीडिया पर इसे लेकर सवाल उठने लगे। पीड़ित की पहचान सार्वजनिक न करने से जुड़े कानूनी और संवेदनशील पहलुओं को लेकर भी चर्चा शुरू हो गई।
तेजस्वी यादव ने मांगी कार्रवाई
मामले को लेकर राजद नेता तेजस्वी यादव ने मुख्यमंत्री के सोशल मीडिया हैंडल से तस्वीर शेयर किए जाने पर कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने इस घटना को लेकर सरकार से जवाब मांगा है।राजद सांसद मीसा भारती ने भी पोस्ट पर सवाल उठाते हुए एफआईआर दर्ज करने की मांग की है। विपक्ष ने कहा है कि पीड़ित की पहचान सार्वजनिक होने से उसकी निजता और सुरक्षा प्रभावित हो सकती है।
15 मिनट बाद डिलीट हुई पोस्ट
मुख्यमंत्री के आधिकारिक एक्स हैंडल से पोस्ट करीब 15 मिनट बाद हटा दी गई। हालांकि, पोस्ट हटाए जाने के बावजूद उसकी तस्वीरें और स्क्रीनशॉट सोशल मीडिया पर प्रसारित होने लगे।फिलहाल विवाद का केंद्र यही है कि संवेदनशील मामले में पीड़ित परिवार की तस्वीर सार्वजनिक क्यों की गई और पोस्ट हटाने से पहले उसे कितने लोगों ने देखा या सेव किया। मामले में सरकार या संबंधित अधिकारियों की ओर से आगे कोई विस्तृत स्पष्टीकरण सामने आता है तो तस्वीर शेयर किए जाने की परिस्थितियां और स्पष्ट हो सकती हैं।

