कॉम्फेड का 1432 करोड़ का मेगा टेंडर: शर्तों को लेकर उठे सवाल, स्थानीय कंपनियों के बाहर होने का आरोप
बिहार स्टेट मिल्क को-ऑपरेटिव फेडरेशन लिमिटेड (कॉम्फेड) के 1432 करोड़ रुपये के मेगा टेंडर को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। टेंडर की शर्तों को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। आरोप है कि ऐसी पात्रता शर्तें तय की गईं, जिनके चलते स्थानीय कंपनियां प्रतिस्पर्धा से बाहर हो गईं।
टेंडर की बड़ी राशि को देखते हुए इस प्रक्रिया पर कारोबारी और संबंधित क्षेत्र के लोगों की नजर है। आरोप लगाने वालों का कहना है कि टेंडर में निर्धारित कुछ शर्तें स्थानीय स्तर पर काम करने वाली कंपनियों के लिए मुश्किल पैदा करती हैं। इससे उनकी भागीदारी सीमित होने की बात कही जा रही है।
मामले में सबसे बड़ा सवाल टेंडर की पात्रता और तकनीकी शर्तों को लेकर उठ रहा है। स्थानीय कारोबारियों का दावा है कि यदि शर्तों में पर्याप्त प्रतिस्पर्धा का अवसर मिलता तो बिहार की कई कंपनियां भी प्रक्रिया में हिस्सा ले सकती थीं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है।
कॉम्फेड की ओर से टेंडर प्रक्रिया में निर्धारित शर्तों का उद्देश्य क्या है और इन्हें किस आधार पर तय किया गया, यह भी चर्चा का विषय बना हुआ है। इतने बड़े मूल्य के टेंडर में पारदर्शिता और सभी योग्य कंपनियों को समान अवसर मिलने को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं।
वहीं, पूरे मामले में आधिकारिक पक्ष सामने आने के बाद स्थिति और स्पष्ट हो सकती है। टेंडर की शर्तों, आवेदन करने वाली कंपनियों और तकनीकी पात्रता के मानकों की जानकारी से यह पता चल सकेगा कि स्थानीय कंपनियां किन कारणों से प्रक्रिया से बाहर हुईं।
1432 करोड़ रुपये की इस बड़ी निविदा को लेकर उठे सवालों के बीच अब निगाहें कॉम्फेड की प्रक्रिया और उसके आधिकारिक स्पष्टीकरण पर टिकी हैं। यदि टेंडर की शर्तों को लेकर औपचारिक आपत्तियां दर्ज होती हैं, तो उनकी जांच के बाद ही आगे की स्थिति स्पष्ट होगी।

