जमुई में ठंड बनी जानलेवा: कमरे में बोरसी जलाकर सोने से मां और दो बच्चे बेहोश, हालत गंभीर
बिहार के जमुई जिले से ठंड के मौसम में लापरवाही की एक डरावनी घटना सामने आई है। पाड़ो गांव में कड़ाके की ठंड से बचने के लिए बंद कमरे में बोरसी (कोयले की अंगीठी) जलाकर सोना एक परिवार के लिए जानलेवा साबित होते-होते रह गया। इस घटना में एक मां और उसके दो मासूम बच्चे दम घुटने से बेहोश हो गए। समय रहते उन्हें अस्पताल पहुंचाया गया, जहां फिलहाल तीनों का इलाज जारी है, जबकि मां की हालत अभी भी गंभीर बताई जा रही है।
पीड़ितों की पहचान स्वर्गीय विपिन शर्मा की पत्नी सुलेखा देवी, उनके 9 वर्षीय पुत्र रिक्की और 6 वर्षीय पुत्री प्रिया कुमारी के रूप में हुई है। परिजनों के अनुसार, ठंड से बचने के लिए रात में कमरे के अंदर बोरसी जलाई गई थी और तीनों उसी कमरे में सो गए। कमरे के दरवाजे और खिड़कियां बंद थीं, जिससे धीरे-धीरे जहरीली गैस भर गई और दम घुटने लगा।
सुबह काफी देर तक जब घर के लोग उन्हें जगाने पहुंचे तो अंदर से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली। शक होने पर परिजनों ने दरवाजा तोड़कर कमरे में प्रवेश किया, जहां तीनों बेहोशी की हालत में पड़े मिले। आनन-फानन में सभी को सदर अस्पताल जमुई पहुंचाया गया।
डॉक्टरों के अनुसार, तीनों को कार्बन मोनोऑक्साइड गैस के प्रभाव से सांस लेने में दिक्कत हुई थी। समय पर इलाज मिलने के कारण बच्चों की हालत अब स्थिर बताई जा रही है, लेकिन मां सुलेखा देवी की स्थिति अभी भी गंभीर बनी हुई है और उन्हें लगातार ऑक्सीजन सपोर्ट पर रखा गया है।
सदर अस्पताल के चिकित्सक ने बताया,
“बंद कमरे में बोरसी या अंगीठी जलाना बेहद खतरनाक होता है। इससे निकलने वाली गैस बिना गंध की होती है, जिससे व्यक्ति को पता भी नहीं चलता और वह बेहोश हो जाता है। समय पर इलाज न मिले तो जान भी जा सकती है।”
घटना के बाद पूरे गांव में दहशत का माहौल है। ग्रामीणों ने बताया कि ठंड बढ़ने के साथ कई लोग बोरसी और अंगीठी का सहारा ले रहे हैं, लेकिन सुरक्षा के प्रति जागरूकता की कमी ऐसी घटनाओं को जन्म दे रही है।
स्थानीय प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से सतर्कता बरतने की अपील की है। अधिकारियों ने कहा है कि ठंड से बचाव के लिए बंद कमरे में कभी भी अंगीठी, बोरसी या कोयला नहीं जलाना चाहिए। यदि जलाना ही हो तो पर्याप्त वेंटिलेशन होना जरूरी है।
यह घटना ठंड के मौसम में आम लोगों के लिए एक गंभीर चेतावनी है। खासकर ग्रामीण इलाकों में जहां अभी भी पारंपरिक तरीकों से ठंड से बचने की कोशिश की जाती है, वहां ऐसी घटनाओं का खतरा अधिक रहता है।

