भाई की डांट से घर से निकली 12वीं की छात्रा, मुजफ्फरपुर स्टेशन पर मानव तस्करों के जाल में फंसी; 85 दिनों तक झेली यातनाएं
भाई की डांट से नाराज होकर घर से निकली 12वीं कक्षा की एक छात्रा को मुजफ्फरपुर जंक्शन पर अकेला बैठना भारी पड़ गया। स्टेशन पर मौजूद मानव तस्करों ने कथित तौर पर उसे अपने जाल में फंसा लिया। इसके बाद अगले 85 दिनों तक छात्रा की जिंदगी बेहद मुश्किल दौर से गुजरी। लंबे समय बाद छात्रा के सामने आने के बाद मानव तस्करी के इस मामले ने एक बार फिर रेलवे स्टेशन और सार्वजनिक स्थानों पर नाबालिगों की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।
बताया जा रहा है कि छात्रा किसी बात को लेकर भाई की डांट से नाराज थी। गुस्से में वह अपना घर छोड़कर निकल गई और मुजफ्फरपुर जंक्शन पहुंच गई। स्टेशन पर वह अकेली बैठी थी। इसी दौरान कथित मानव तस्करों की नजर उस पर पड़ी।
अकेली छात्रा को बनाया निशाना
अकेली और परेशान छात्रा को देखकर आरोपियों ने कथित तौर पर उससे बातचीत शुरू की। उन्होंने उसे भरोसे में लिया और मदद करने का झांसा दिया। छात्रा को क्या पता था कि जिन लोगों पर वह भरोसा कर रही है, वही उसे एक बड़े जाल में फंसा सकते हैं।
आरोप है कि इसके बाद छात्रा को बहला-फुसलाकर अपने साथ ले जाया गया। वह अपने परिवार से दूर हो गई और अगले कई दिनों तक उसके बारे में कोई जानकारी नहीं मिल सकी।
85 दिनों तक नरक जैसी जिंदगी
छात्रा के घर से निकलने के बाद करीब 85 दिन तक उसका जीवन बेहद कठिन परिस्थितियों से गुजरा। इस दौरान उसके साथ क्या-क्या हुआ, इसकी पूरी जानकारी जांच के बाद ही सामने आ सकेगी। मामले में मानव तस्करी से जुड़े लोगों की भूमिका की जांच की जा रही है।
लंबे समय तक परिवार से संपर्क नहीं होने के कारण परिजन भी परेशान रहे। छात्रा के वापस मिलने के बाद पूरे मामले की जानकारी सामने आने लगी।
जांच एजेंसियां जुटा रहीं जानकारी
मामला सामने आने के बाद संबंधित एजेंसियों ने जांच शुरू कर दी है। छात्रा से पूछताछ कर यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि उसे स्टेशन से कौन लोग अपने साथ ले गए, उसे कहां रखा गया और इस पूरे नेटवर्क में कितने लोग शामिल हैं।
जांच में यह भी पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि आरोपी पहले से स्टेशन पर ऐसे नाबालिगों को निशाना बनाते थे या नहीं। पुलिस और संबंधित एजेंसियां संभावित आरोपियों की पहचान करने में जुटी हैं।
बच्चों की सुरक्षा को लेकर बड़ा सवाल
यह घटना माता-पिता और अभिभावकों के लिए भी एक महत्वपूर्ण चेतावनी है। किशोर उम्र में गुस्से या भावनात्मक परेशानी के कारण बच्चे घर से निकल जाते हैं और कई बार अनजान लोगों पर भरोसा कर बैठते हैं। रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड और अन्य सार्वजनिक स्थानों पर ऐसे बच्चे मानव तस्करों के आसान निशाने बन सकते हैं।
मामले ने यह सवाल भी खड़ा किया है कि सार्वजनिक स्थानों पर अकेले मिलने वाले नाबालिगों की सुरक्षा के लिए निगरानी और मदद की व्यवस्था कितनी प्रभावी है। फिलहाल छात्रा के बयान और जांच के आधार पर मानव तस्करी के पूरे नेटवर्क का पता लगाने की कोशिश की जा रही है।

