Samachar Nama
×

आरक्षण पर तकरार के बीच चिराग पासवान ने मांझी के बेटे की मांग का किया समर्थन, जानें क्या है पूरा मामला

आरक्षण पर तकरार के बीच चिराग पासवान ने मांझी के बेटे की मांग का किया समर्थन, जानें क्या है पूरा मामला

बिहार की राजनीति में एनडीए के दो घटक दलों लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) और हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा के बीच एससी-एसटी आरक्षण के मुद्दे पर जारी खींचतान के बीच एक दिलचस्प राजनीतिक तस्वीर सामने आई है। लोजपा (रामविलास) प्रमुख और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने हम के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं बिहार सरकार में मंत्री संतोष कुमार सुमन की एक मांग का समर्थन किया है। दोनों नेताओं के बीच यह सहमति ऐसे समय बनी है, जब आरक्षण में सब-कैटेगराइजेशन को लेकर दोनों पार्टियां आमने-सामने हैं।

बख्तियारपुर का नाम बदलने की मांग पर चिराग का समर्थन

दरअसल, संतोष कुमार सुमन ने पटना जिले के बख्तियारपुर का नाम बदलकर ‘नीतीशपुरम’ करने की मांग की थी। उनका तर्क था कि बख्तियारपुर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की जन्मभूमि है और राज्य के विकास तथा सामाजिक बदलाव में उनके योगदान को देखते हुए इस स्थान का नाम उनके नाम पर किया जाना चाहिए।

अब चिराग पासवान ने भी इस प्रस्ताव का समर्थन कर दिया है। पटना में मीडिया से बातचीत के दौरान चिराग ने कहा कि बख्तियारपुर का नाम नीतीश कुमार के नाम पर किए जाने का सुझाव अच्छा है। उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार ने लंबे समय तक बिहार की तरक्की में महत्वपूर्ण योगदान दिया है और उनके नाम पर किसी स्थान का नाम रखने से आने वाली पीढ़ियां उनके योगदान को याद करेंगी।

रामविलास पासवान की प्रतिमा की भी मांग

चिराग पासवान ने इसी दौरान बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से मुलाकात कर अपने पिता और लोजपा संस्थापक दिवंगत रामविलास पासवान की पटना में आदमकद प्रतिमा लगाने की मांग भी रखी।

चिराग ने कहा कि नीतीश कुमार, रामविलास पासवान और लालू प्रसाद यादव जैसे नेताओं का बिहार की राजनीति में अपना योगदान रहा है। उनके नाम पर जगहों का नामकरण या उनकी प्रतिमाएं लगाने में कोई गलत बात नहीं है।

आरक्षण के मुद्दे पर दोनों पार्टियां आमने-सामने

हालांकि, नामकरण के मुद्दे पर एक राय रखने वाले चिराग पासवान और संतोष सुमन एससी-एसटी आरक्षण के उप-वर्गीकरण के सवाल पर बिल्कुल अलग-अलग रुख रखते हैं।

संतोष सुमन ने एससी-एसटी आरक्षण में सब-कैटेगराइजेशन का समर्थन किया है। उनका कहना है कि आरक्षण का लाभ उन समुदायों तक भी पहुंचना चाहिए, जो लंबे समय से इससे अपेक्षित लाभ नहीं उठा पाए हैं। वह आरक्षण की समीक्षा को खत्म करने के बजाय उसके लाभ को सबसे वंचित वर्गों तक पहुंचाने के नजरिए से देखते हैं।

वहीं, चिराग पासवान इसका विरोध कर चुके हैं। उनका तर्क है कि एससी-एसटी आरक्षण का आधार आर्थिक स्थिति नहीं, बल्कि ऐतिहासिक सामाजिक भेदभाव और वंचना है। चिराग ने आरक्षण की समीक्षा और उसमें बदलाव की मांग को लेकर कड़ा रुख अपनाया था।

इस्तीफे तक पहुंची थी दोनों नेताओं की जुबानी जंग

आरक्षण के मुद्दे पर दोनों नेताओं के बीच विवाद इतना बढ़ गया था कि चिराग पासवान ने जीतन राम मांझी और संतोष सुमन से मंत्री पद छोड़ने तक की बात कही थी। इसके जवाब में संतोष सुमन ने पलटवार करते हुए चिराग को पहले खुद इस्तीफा देने की नसीहत दी थी। इससे एनडीए के भीतर आरक्षण को लेकर मतभेद खुलकर सामने आ गए थे।

ऐसे में बख्तियारपुर के नामकरण को लेकर चिराग और संतोष सुमन की सहमति बिहार के मौजूदा राजनीतिक समीकरणों के बीच खास महत्व रखती है। हालांकि, एससी-एसटी आरक्षण जैसे संवेदनशील मुद्दे पर दोनों दलों के रुख में फिलहाल कोई बदलाव नजर नहीं आया है।

Share this story

Tags