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हर थाना परिसर में बनेगा बाल सहायता डेस्क, लॉकअप से अलग होगा बच्चों के लिए सुरक्षित और रंगीन स्थान

हर थाना परिसर में बनेगा बाल सहायता डेस्क, लॉकअप से अलग होगा बच्चों के लिए सुरक्षित और रंगीन स्थान

बच्चों से जुड़े मामलों में पुलिस की कार्रवाई को अधिक संवेदनशील और बाल-अनुकूल बनाने के लिए अब प्रत्येक थाना परिसर में बाल सहायता डेस्क संचालित किया जाएगा। यह डेस्क थाने के बाल कल्याण पुलिस पदाधिकारी के नेतृत्व में काम करेगा। बच्चों से जुड़े मामलों में उनकी सुरक्षा, सहायता और आवश्यक प्रक्रिया को ध्यान में रखते हुए इस डेस्क को सामान्य पुलिस व्यवस्था से अलग रखा जाएगा।

बाल सहायता डेस्क को थाने के लॉकअप से पूरी तरह अलग स्थान पर बनाया जाएगा। इसके लिए ऐसा वातावरण तैयार किया जाएगा, जिससे किसी बच्चे को थाने में आने पर डर या तनाव महसूस न हो। डेस्क की दीवारों को रंगीन बनाया जाएगा और बच्चों के अनुकूल माहौल तैयार करने पर जोर दिया जाएगा।

बाल कल्याण पुलिस पदाधिकारी करेंगे संचालन

प्रत्येक थाने में बनाए जाने वाले बाल सहायता डेस्क की जिम्मेदारी बाल कल्याण पुलिस पदाधिकारी की होगी। अधिकारी बच्चों से संबंधित मामलों को संवेदनशीलता के साथ संभालेंगे और जरूरत के अनुसार संबंधित विभागों या बाल संरक्षण संस्थाओं से समन्वय करेंगे।

इस व्यवस्था का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी बच्चे को सामान्य पुलिस लॉकअप या अपराधियों के लिए बनाए गए स्थान के आसपास न रखा जाए। बच्चों से जुड़े मामलों में उनकी उम्र और मानसिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए अलग प्रक्रिया अपनाने पर जोर दिया जा रहा है।

लॉकअप से पूरी तरह अलग होगी व्यवस्था

बाल सहायता डेस्क को पुलिस थाने के लॉकअप से अलग रखने का विशेष प्रावधान किया गया है। इसका मकसद बच्चों और अन्य आरोपियों के बीच किसी भी तरह के संपर्क की संभावना को कम करना है। साथ ही बच्चे को पुलिस थाने का माहौल डरावना न लगे, इसके लिए डेस्क को सामान्य पुलिस कार्यालयों से अलग तरीके से विकसित किया जाएगा।

दीवारों पर रंगों का इस्तेमाल करने के साथ ही जगह को साफ-सुथरा और बच्चों के लिए सहज बनाने की कोशिश की जाएगी। जरूरत के अनुसार यहां बैठने की व्यवस्था और बच्चों से बातचीत के लिए अलग स्थान भी उपलब्ध कराया जा सकता है।

बच्चों से जुड़े मामलों में संवेदनशीलता पर जोर

बच्चों से संबंधित मामलों में पुलिस की भूमिका केवल कानूनी कार्रवाई तक सीमित नहीं होती। ऐसे मामलों में बच्चे की सुरक्षा, सम्मान और मानसिक स्थिति का ध्यान रखना भी जरूरी है। बाल सहायता डेस्क की व्यवस्था इसी सोच के तहत तैयार की जा रही है।

यदि कोई बच्चा किसी मामले में पीड़ित है, गवाह है या कानून के संपर्क में आया है, तो उसके साथ बातचीत और कार्रवाई निर्धारित बाल संरक्षण नियमों के अनुरूप करने की जरूरत होती है। अलग डेस्क होने से पुलिस अधिकारियों को भी ऐसे मामलों को व्यवस्थित तरीके से संभालने में मदद मिलेगी।

जरूरत पड़ने पर अन्य विभागों से समन्वय

बाल सहायता डेस्क के माध्यम से बच्चों से जुड़े मामलों में पुलिस अन्य संबंधित विभागों और बाल संरक्षण तंत्र के साथ समन्वय कर सकेगी। गंभीर मामलों में बच्चे को आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने के लिए संबंधित विशेषज्ञों या संस्थाओं की मदद भी ली जा सकती है।

नई व्यवस्था का उद्देश्य थानों में बच्चों के लिए अधिक सुरक्षित और भरोसेमंद माहौल तैयार करना है। रंगीन दीवारों और अलग स्थान जैसी व्यवस्थाओं के जरिए पुलिस थाने को बच्चों के लिए कम भयावह बनाने की कोशिश की जाएगी। आने वाले समय में बाल सहायता डेस्क के संचालन से बच्चों से जुड़े मामलों की सुनवाई और सहायता प्रक्रिया को अधिक संवेदनशील और व्यवस्थित बनाने की उम्मीद है।

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