भागलपुर सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में अव्यवस्था: वरिष्ठ डॉक्टरों की गैरहाजिरी से मरीज परेशान, जूनियर डॉक्टरों के भरोसे इलाज
भागलपुर के सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाओं की हालत पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। अस्पताल में वरिष्ठ डॉक्टरों की अनुपस्थिति और कथित मनमानी के कारण दूर-दराज से इलाज के लिए आने वाले मरीजों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। हालात ऐसे हैं कि कई विभागों में जूनियर डॉक्टर ही ओपीडी और इलाज की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं, जबकि विशेषज्ञ डॉक्टर न तो समय पर बैठक में पहुंच रहे हैं और न ही ओपीडी में नियमित रूप से नजर आ रहे हैं।
मरीजों और उनके परिजनों का कहना है कि सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल का उद्देश्य ही गंभीर और जटिल बीमारियों का विशेषज्ञ इलाज उपलब्ध कराना था। लेकिन हकीकत यह है कि जब मरीज यहां पहुंचते हैं, तो उन्हें वरिष्ठ डॉक्टरों की जगह जूनियर डॉक्टरों से परामर्श लेना पड़ता है। इससे मरीजों में असंतोष और चिंता दोनों बढ़ रही है।
अस्पताल में इलाज के लिए आए एक मरीज के परिजन ने बताया,
“हम सैकड़ों किलोमीटर दूर से आए हैं, यह सोचकर कि यहां विशेषज्ञ डॉक्टर मिलेंगे। लेकिन कई बार घंटों इंतजार के बाद भी सीनियर डॉक्टर नहीं आते। मजबूरी में जूनियर डॉक्टर इलाज कर रहे हैं।”
सूत्रों के अनुसार, कई वरिष्ठ डॉक्टर नियमित बैठकों में शामिल नहीं हो रहे हैं और ओपीडी समय के दौरान भी अनुपस्थित पाए गए हैं। इससे अस्पताल की कार्यप्रणाली पर नकारात्मक असर पड़ रहा है और मरीजों को समय पर सही सलाह नहीं मिल पा रही है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए अस्पताल के उपाधीक्षक (डिप्टी सुपरिंटेंडेंट) ने हाल ही में निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान कई वरिष्ठ डॉक्टर ड्यूटी से अनुपस्थित पाए गए। इसके बाद उपाधीक्षक ने अनुपस्थित डॉक्टरों से स्पष्टीकरण मांगा है और रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को भेजने की तैयारी की जा रही है।
उपाधीक्षक ने कहा कि
“सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में अनुशासन और समयबद्धता बेहद जरूरी है। मरीजों की सेवा में किसी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। जो भी डॉक्टर बिना सूचना के अनुपस्थित पाए गए हैं, उनसे जवाब मांगा गया है।”
हालांकि, इस कार्रवाई के बावजूद अस्पताल की व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वरिष्ठ डॉक्टर अपनी जिम्मेदारी नहीं निभाते, तो इससे न केवल मरीजों की सेहत पर असर पड़ता है, बल्कि अस्पताल की साख भी कमजोर होती है।
स्थानीय सामाजिक संगठनों ने भी इस मामले को लेकर नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि सरकार ने सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल पर करोड़ों रुपये खर्च किए हैं, ताकि आम लोगों को बड़े शहरों में भटकना न पड़े। लेकिन अगर यहां भी विशेषज्ञ डॉक्टर उपलब्ध नहीं रहेंगे, तो इसका उद्देश्य ही खत्म हो जाएगा।
फिलहाल, मरीजों और उनके परिजनों की नजर अस्पताल प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी है। लोग उम्मीद कर रहे हैं कि निरीक्षण और स्पष्टीकरण के बाद व्यवस्था में सुधार होगा और वरिष्ठ डॉक्टर नियमित रूप से ओपीडी व बैठकों में उपस्थित होंगे।
इस पूरे मामले ने भागलपुर सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं और यह साफ कर दिया है कि स्वास्थ्य सेवाओं में अनुशासन और जवाबदेही कितनी जरूरी है।

