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CAG को 70,877 करोड़ रुपये के खर्च का पूरा ब्योरा नहीं मिला, विपक्ष ने उठाए घोटाले के आरोप

CAG को 70,877 करोड़ रुपये के खर्च का पूरा ब्योरा नहीं मिला, विपक्ष ने उठाए घोटाले के आरोप

बिहार में 2016-17 से 2022-23 तक के सरकारी खर्च का आंकलाग्राहण (Audit) अब भी विवादों में है। नियंत्रक व महालेखा परीक्षक (CAG) को इस अवधि के कुल 70,877.61 करोड़ रुपये के खर्च का पूरा ब्योरा नहीं मिला है। हाई कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद सरकार ने 18,687.98 करोड़ रुपये के उपयोग प्रमाण (UC) उपलब्ध कराए, लेकिन अभी भी 52,189.63 करोड़ रुपये का विवरण लंबित है।

वित्तीय मामलों और बजट पर नजर रखने वाले विपक्ष ने इस मुद्दे को गंभीर घोटाला बताते हुए राज्य सरकार से सवाल उठाए हैं। विपक्षी नेताओं का कहना है कि इतने बड़े पैमाने पर उपयोग प्रमाण न मिलने से न केवल वित्तीय पारदर्शिता पर सवाल उठता है, बल्कि जनता के पैसे के उचित उपयोग पर भी संदेह पैदा होता है।

वहीं, राज्य सरकार ने आश्वासन दिया है कि अगले दो माह के भीतर लंबित राशि का विस्तृत ब्योरा CAG को प्रस्तुत किया जाएगा। अधिकारियों का कहना है कि लंबित प्रमाण और दस्तावेज जुटाने में तकनीकी और प्रशासनिक प्रक्रियाओं के कारण देरी हुई है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला वित्तीय अनुशासन और सरकारी खर्च की निगरानी के महत्व को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि अगर बड़े पैमाने पर खर्च का विवरण समय पर CAG को नहीं मिलता, तो इससे न केवल राज्य के बजट और निवेश योजनाओं की समीक्षा प्रभावित होती है, बल्कि भविष्य में वित्तीय योजनाओं की पारदर्शिता पर भी असर पड़ता है।

राज्य सरकार ने यह भी कहा कि सभी लंबित प्रमाण जुटाने के बाद वित्तीय ऑडिट और रिपोर्टिंग प्रक्रिया पूरी पारदर्शिता के साथ की जाएगी। अधिकारियों का कहना है कि यह कदम वित्तीय अनुशासन बनाए रखने और जनता के विश्वास को बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण है।

वित्तीय विश्लेषकों का कहना है कि बिहार जैसे बड़े राज्य में 7 वर्षों के खर्च का विवरण जुटाना चुनौतीपूर्ण हो सकता है, लेकिन CAG को समय पर पूरी जानकारी न देना गंभीर सवाल खड़े करता है। उनका कहना है कि लंबित राशि के कारण बजट की समीक्षा और योजनाओं की प्रभावशीलता का मूल्यांकन मुश्किल हो सकता है।

विपक्षी दलों ने राज्य सरकार से मांग की है कि लंबित राशि का पूरा ब्योरा समय से पहले CAG को उपलब्ध कराया जाए और भविष्य में ऐसी देरी की संभावना न रहे। उन्होंने कहा कि इससे वित्तीय जवाबदेही और सरकारी योजना का सही लाभ सुनिश्चित होगा।

बिहार सरकार के अधिकारियों ने बताया कि 18,687.98 करोड़ रुपये के यूसी मिलने के बाद भी बाकी राशि जुटाने के लिए विभिन्न विभागों और अधिकारियों के साथ समन्वय किया जा रहा है। उन्होंने आश्वासन दिया कि रिपोर्ट दो माह के भीतर CAG को सौंप दी जाएगी।

इस मामले ने राज्य में वित्तीय अनुशासन, पारदर्शिता और सरकारी खर्च की निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि लंबित राशि का सही समय पर विवरण न मिलने से न केवल ऑडिट प्रक्रिया प्रभावित होती है, बल्कि भविष्य में योजना और नीति निर्माण पर भी असर पड़ता है।

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