बिहार में गंगा नदी में नाव पलटी, एक ही परिवार के 7 बच्चों की मौत; 13 शव बरामद, 10 घंटे बाद भी रेस्क्यू जारी
बिहार के वैशाली जिले के राघोपुर में गंगा नदी में नाव पलटने से बड़ा हादसा हो गया। मंगलवार रात करीब 8:30 बजे हुए इस हादसे में कई लोग नदी में डूब गए। नाव पर करीब 30 लोगों के सवार होने की बात सामने आई है। हादसे के बाद अब तक 13 बच्चों के शव बरामद किए जाने की जानकारी है, जबकि लापता लोगों की तलाश के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है। इस घटना में एक ही परिवार के सात बच्चों की जान चली गई, जिससे परिजनों और ग्रामीणों में मातम पसरा हुआ है।
हादसे के बाद स्थानीय लोगों ने नाव की खराब हालत को लेकर प्रशासन पर गंभीर सवाल उठाए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि उन्होंने करीब तीन साल पहले ही नाव की स्थिति खराब होने की शिकायत की थी। इसके बावजूद मरम्मत कराने का आश्वासन तो मिला, लेकिन समय रहते जरूरी कार्रवाई नहीं हुई।
'आज हमारे परिवार के सात बच्चों की मौत हो गई'
हादसे में अपने परिवार के सात बच्चों को खोने वाले सुरेश राय घटना को याद कर भावुक हो गए। उन्होंने बताया कि उनकी आंखों के सामने 15 से ज्यादा बच्चे नदी में डूब रहे थे। ग्रामीण लकड़ी के सहारे शवों को बाहर निकालने की कोशिश कर रहे थे। सुरेश राय ने आरोप लगाया कि ग्रामीणों ने तीन साल पहले प्रशासन को नाव की खराब हालत के बारे में बताया था। हर बार मरम्मत कराने आश्वासन दिया गया, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हुआ। उन्होंने दुख जताते हुए कहा कि अब उनके परिवार के सात बच्चों की मौत हो चुकी है। ऐसे में वे प्रशासन से क्या मांग करें।परिजनों का दर्द और ग्रामीणों की नाराजगी इस हादसे के बाद साफ नजर आ रही है। जिन परिवारों ने अपने बच्चों को खोया है, उनके लिए यह घटना कभी न भूलने वाला दुख बन गई है।
रात करीब 8:30 बजे गंगा में पलटी नाव
जानकारी के मुताबिक, मंगलवार रात करीब 8:30 बजे वैशाली जिले के राघोपुर क्षेत्र में गंगा नदी में नाव पलट गई। नाव पर लगभग 30 लोग सवार थे। अचानक हुए हादसे के बाद नदी में अफरा-तफरी मच गई और कई लोग डूबने लगे।घटना की जानकारी मिलने के बाद स्थानीय ग्रामीणों और बचाव दल ने लोगों को तलाशने और बाहर निकालने का प्रयास शुरू किया। अब तक 13 बच्चों के शव बरामद किए जाने की सूचना है। हादसे के करीब 10 घंटे बाद भी लापता लोगों की तलाश के लिए अभियान जारी था।रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान नदी में डूबे लोगों की तलाश की जा रही है। हादसे में कितने लोग सुरक्षित बाहर निकाले गए और कितने लोग अभी लापता हैं, इसकी अंतिम स्थिति आधिकारिक जानकारी के बाद ही स्पष्ट होगी।
तीन साल पहले शिकायत, फिर भी नहीं हुई मरम्मत?
हादसे के बाद सबसे बड़ा सवाल नाव की सुरक्षा को लेकर उठ रहा है। ग्रामीणों का वा है कि नाव की हालत खराब थी और इसकी मरम्मत कराने के लिए पहले भी प्रशासन से शिकायत की गई थी। इसके बावजूद कथित तौर पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।ग्रामीणों के आरोपों की जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि नाव की स्थिति कैसी थी, उसकी मरम्मत को लेकर शिकायत कब की गई और जिम्मेदार अधिकारियों ने क्या कार्रवाई की थी।
हादसे के बाद प्रशासन की जवाबदेही पर सवाल
गंगा नदी में नाव पलटने की इस घटना ने नदी पार करने के लिए इस्तेमाल होने वाली नावों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि नाव की हालत वास्तव में खराब थी, तो उसका इस्तेमाल क्यों किया जा रहा था? क्या नाव की नियमित जांच की गई थी? क्या उसमें सवार लोगों की संख्या और सुरक्षा के जरूरी इंतजामों पर ध्यान दिया गया था?इन सवालों के जवाब जांच के बाद सामने आने चाहिए। फिलहाल, बचाव अभियान जारी रहने के बीच पीड़ित परिवार अपने बच्चों को खोने के गहरे सदमे में हैं। ग्रामीणों की मांग है कि हादसे की जांच कर जिम्मेदारी तय की जाए, ताकि भविष्य में ऐसी त्रासदी दोबारा न हो।

