बिहार का सुल्तानगंज-अगुवानी गंगा पुल: 11 साल बाद भी निर्माण अधूरा, सवाल बने समयसीमा और ध्वस्त सुपरस्ट्रक्चर
जब बिहार में पुलों की चर्चा होती है तो लोगों के जेहन में सबसे पहले सुल्तानगंज-अगुवानी गंगा पुल का नाम आता है। यह पुल वर्षों से निर्माण के अधूरे काम और बार-बार विलंब के कारण सुर्खियों में बना हुआ है। निर्माण कार्य शुरू हुए 11 साल बीत चुके हैं, लेकिन अब तक पुल का काम पूरा नहीं हो पाया है।
स्थानीय लोगों और परियोजना विशेषज्ञों का कहना है कि यह परियोजना बिहार के आर्थिक और यातायात नेटवर्क के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। सुल्तानगंज और अगुवानी को जोड़ने वाला यह पुल क्षेत्र के व्यापार, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं को आसान बनाने में अहम भूमिका निभाने वाला था। लेकिन लगातार निर्माण में देरी और तकनीकी समस्याएं इसे विवादित बनाती रही हैं।
सूत्रों के अनुसार, पुल की समय सीमा 12 से अधिक बार फेल हो चुकी है। वर्ष 2022 से 2024 के बीच सुपरस्ट्रक्चर तीन बार ध्वस्त हो गया, जिससे परियोजना की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल उठे। विशेषज्ञों का कहना है कि यह परियोजना निर्माण और गुणवत्ता मानकों के सख्त पालन की कमी के कारण बाधित हुई है।
स्थानीय व्यापारियों और निवासियों ने बार-बार परियोजना में देरी पर नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि पुल बनने में लगातार देरी के कारण यातायात कठिनाइयों और आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने सरकार और ठेकेदारों से अपील की है कि निर्माण कार्य जल्द पूरा किया जाए।
पुल निर्माण परियोजना के अधिकारियों का कहना है कि तकनीकी और फंडिंग समस्याओं के कारण कई बार निर्माण कार्य बाधित हुआ। हालांकि उन्होंने आश्वासन दिया है कि अब निर्माण कार्य सुचारू रूप से चल रहा है और जल्द ही पुल का संचालन शुरू हो जाएगा।
विशेषज्ञों का कहना है कि सुल्तानगंज-अगुवानी पुल केवल सड़क परिवहन की सुविधा नहीं देगा, बल्कि क्षेत्रीय विकास और निवेश आकर्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। उन्होंने सरकार से आग्रह किया है कि परियोजना में गुणवत्ता नियंत्रण और समयबद्धता को प्राथमिकता दी जाए।
कुल मिलाकर, बिहार का सुल्तानगंज-अगुवानी गंगा पुल एक महत्वाकांक्षी परियोजना है जो 11 साल बाद भी अधूरी है। बार-बार ध्वस्त होने वाले सुपरस्ट्रक्चर और समयसीमा के लगातार टूटने ने परियोजना की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। नागरिकों और विशेषज्ञों की नजर अब इस पर है कि सरकार और ठेकेदार मिलकर इस लंबे इंतजार को आखिरकार खत्म करें।
यह पुल सिर्फ सुल्तानगंज और अगुवानी को जोड़ने वाला मार्ग नहीं, बल्कि बिहार में सड़क, व्यापार और सामाजिक कनेक्टिविटी के लिए प्रतीकात्मक महत्व रखता है। अगर इसे समय पर पूरा किया जाता है तो यह क्षेत्रीय विकास में मील का पत्थर साबित होगा।

