बिहार का खास धान पश्चिम चंपारण में मचा रहा धमाल, GI टैग के बाद रेट ने आसमान छूआ
बिहार की धरती पर उगने वाला एक खास धान अब पूरे देश में चर्चा का विषय बन चुका है। इस धान की किस्म सिर्फ पश्चिम चंपारण के कुछ इलाकों में ही उगती है और मकर संक्रांति के समय इसकी मांग सबसे अधिक रहती है। इस धान से बने चूड़े की खासियत और स्वाद के चलते लोग इसे खरीदने के लिए लंबी दूरी तय करने को भी तैयार रहते हैं।
खास बात यह है कि इस धान को हाल ही में जीआई (Geographical Indication) टैग मिल गया है। इससे इस धान की विशिष्ट पहचान और गुणवत्ता की मान्यता भी बढ़ गई है। स्थानीय किसान बताते हैं कि इस GI टैग के बाद चूड़े और अन्य उत्पादों की कीमतें ऑल टाइम हाई तक पहुँच गई हैं।
किसानों के अनुसार, यह धान केवल उस मिट्टी और जलवायु में ही उग सकता है जो पश्चिम चंपारण के इलाके में पाई जाती है। इसके पौधों की देखभाल और कटाई का तरीका पारंपरिक है, जो पीढ़ी दर पीढ़ी चली आ रही है। यही कारण है कि इसका स्वाद और गुणवत्ता अलग है।
मकर संक्रांति के अवसर पर चूड़ा और पिठ्ठा बनाने के लिए इसकी मांग इतनी बढ़ जाती है कि बाजार में लोग इसे खरीदने के लिए पहले से ही रिज़र्वेशन करवा लेते हैं। व्यापारियों का कहना है कि GI टैग मिलने के बाद अब इस धान की कीमतें पिछले साल की तुलना में लगभग 30-40 प्रतिशत बढ़ गई हैं।
स्थानीय कृषि विभाग के अधिकारियों का कहना है कि इस तरह की विशिष्ट किस्मों को बढ़ावा देना न सिर्फ किसानों के लिए फायदेमंद है, बल्कि राज्य की कृषि पहचान और ब्रांड वैल्यू को भी बढ़ाता है। अधिकारी बताते हैं कि राज्य सरकार और कृषि विभाग इस धान की पैदावार और मार्केटिंग को और बेहतर बनाने के लिए कई पहल कर रहे हैं।
किसान इस बात से खुश हैं कि उनका परिश्रम और परंपरागत ज्ञान अब राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सराहा जा रहा है। कई लोग तो अब ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर इस धान से बने चूड़े और अन्य उत्पाद ऑर्डर करने लगे हैं। इसका सीधा फायदा किसानों को मिल रहा है और इस क्षेत्र की अर्थव्यवस्था भी मजबूत हो रही है।
विशेषज्ञों का कहना है कि GI टैग के बाद इस धान की ब्रांडिंग और प्रमोशन पर और जोर देने की जरूरत है। यह न केवल किसानों की आमदनी बढ़ाएगा, बल्कि बिहार को कृषि और पारंपरिक उत्पादों के क्षेत्र में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाएगा।
इस धान की लोकप्रियता के पीछे इसका स्वाद, खुशबू और पारंपरिक पद्धति से उगाया जाना सबसे बड़ा कारण है। मकर संक्रांति जैसे त्योहारों में इसकी मांग चरम पर होती है, और यह साबित करता है कि बिहार की कृषि विरासत में कितनी गहराई और गुणवत्ता मौजूद है।
पश्चिम चंपारण का यह खास धान अब सिर्फ स्थानीय ही नहीं, बल्कि पूरे देश में पहचान बना चुका है। किसान और व्यापारी दोनों इसे बिहार की विशेष कृषि पहचान के रूप में देख रहे हैं और इसे बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं।

