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BRICS सम्मेलन की वेलकम किट में बिहार का मखाना-सत्तू, वैश्विक मंच पर फिर छाया उत्तर बिहार का स्वाद

BRICS सम्मेलन की वेलकम किट में बिहार का मखाना-सत्तू, वैश्विक मंच पर फिर छाया उत्तर बिहार का स्वाद

दिल्ली में आयोजित BRICS सम्मेलन में बिहार के पारंपरिक उत्पाद मखाना और सत्तू को खास जगह मिली है। सम्मेलन में शामिल होने वाले विदेशी प्रतिनिधियों और पत्रकारों को दी जा रही वेलकम किट में बिहार के मखाना और सत्तू को शामिल किया गया है। इससे उत्तर बिहार के इन पारंपरिक खाद्य उत्पादों को एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय मंच पर पहचान मिली है।

BRICS सम्मेलन में दुनिया के अलग-अलग देशों से आए प्रतिनिधि और पत्रकार हिस्सा ले रहे हैं। ऐसे में उन्हें दी जाने वाली वेलकम किट में बिहार के स्थानीय उत्पादों को शामिल किया जाना राज्य के लिए गौरव का विषय माना जा रहा है। मखाना और सत्तू जैसे पारंपरिक उत्पाद अब केवल बिहार के घरों और स्थानीय बाजारों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि देश-दुनिया में इनकी पहचान लगातार बढ़ रही है।

बिहार का मखाना खास तौर पर उत्तर बिहार के कई जिलों में बड़े पैमाने पर उत्पादित किया जाता है। इसकी खेती और प्रसंस्करण से बड़ी संख्या में किसान और कारोबारी जुड़े हुए हैं। मखाने की बढ़ती मांग ने इसे बिहार के प्रमुख कृषि उत्पादों में शामिल कर दिया है। स्वास्थ्यवर्धक खाद्य पदार्थ के रूप में भी मखाने की मांग देश के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ी है।

वहीं सत्तू बिहार की पारंपरिक खानपान संस्कृति का अहम हिस्सा है। चने से तैयार होने वाला सत्तू गर्मी के मौसम में पेय के रूप में इस्तेमाल होने के साथ कई पारंपरिक व्यंजनों में भी उपयोग किया जाता है। पौष्टिकता और आसानी से उपलब्ध होने के कारण सत्तू को बिहार की पहचान से जोड़कर देखा जाता है।

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने भी BRICS सम्मेलन की वेलकम किट में बिहार के मखाना और सत्तू को जगह मिलने पर इसे राज्य के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया है। उन्होंने इसे बिहार के स्वाद, परंपरा और उद्यमिता की वैश्विक पहचान से जोड़ते हुए कहा कि स्थानीय उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय मंच पर स्थान मिलना राज्य की क्षमता को दर्शाता है।

मखाना और सत्तू को वैश्विक मंच पर बढ़ावा मिलने से बिहार के किसानों और स्थानीय उद्यमियों के लिए नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है। यदि इन उत्पादों की ब्रांडिंग, पैकेजिंग और गुणवत्ता को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप लगातार बेहतर किया जाए तो इनके निर्यात की संभावनाएं भी बढ़ सकती हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार, किसी बड़े अंतरराष्ट्रीय आयोजन में स्थानीय उत्पादों को शामिल करना उनकी ब्रांड पहचान मजबूत करने का प्रभावी माध्यम हो सकता है। विदेशी प्रतिनिधियों और पत्रकारों को जब बिहार के पारंपरिक खाद्य उत्पादों का स्वाद और जानकारी मिलेगी तो इससे इनके प्रति वैश्विक रुचि बढ़ने की संभावना है।

BRICS सम्मेलन की वेलकम किट में मखाना और सत्तू को जगह मिलना इसलिए भी खास है क्योंकि दोनों उत्पाद बिहार की संस्कृति, कृषि और स्थानीय अर्थव्यवस्था से गहराई से जुड़े हैं। अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों तक इनकी पहुंच बिहार के पारंपरिक स्वाद को नई पहचान देने के साथ राज्य के स्थानीय उत्पादों और उद्यमिता के लिए नए बाजारों का रास्ता खोल सकती है।

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