बिहार किन्नर कल्याण बोर्ड भंग, सभी सदस्यों का मनोनयन खत्म; फुटेज में देंखे नए कानून के तहत होगा पुनर्गठन
बिहार सरकार ने राज्य किन्नर कल्याण बोर्ड यानी ट्रांसजेंडर कल्याण बोर्ड को भंग कर दिया है। समाज कल्याण विभाग ने शुक्रवार को इस संबंध में अधिसूचना जारी की। सरकार के आदेश के साथ ही बोर्ड में मनोनीत सदस्यों और सरकारी सदस्यों की सदस्यता भी समाप्त कर दी गई है। अब केंद्र सरकार के नए कानून में हुए बदलावों के अनुरूप बोर्ड का नए सिरे से गठन किया जाएगा। सरकार की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि केंद्र सरकार ने 30 मार्च 2026 को ‘द ट्रांसजेंडर पर्सन्स (प्रोटेक्शन ऑफ राइट्स) अमेंडमेंट एक्ट, 2026’ अधिसूचित किया है। संशोधित कानून के बाद ट्रांसजेंडर कल्याण से जुड़े प्रावधानों में बदलाव हुए हैं। इन्हीं बदलावों के अनुरूप बिहार में बोर्ड के पुनर्गठन की जरूरत महसूस की गई है।
सभी सदस्यों का मनोनयन समाप्त
बोर्ड के भंग होने के साथ ही उसमें शामिल सभी मनोनीत और सरकारी सदस्यों की सदस्यता समाप्त हो गई है। बिहार किन्नर कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष समाज कल्याण विभाग के मंत्री होते थे।बोर्ड में पटना से राजन सिंह और अनुप्रिया सिंह, गया से शांति नायक उर्फ सुरेश हिजड़ा, सोनपुर से संतोष कुमार, दरभंगा से अद्विका चौधरी और बेगूसराय से साजन कुमार सदस्य के रूप में शामिल थे। अब इन सभी का मनोनयन समाप्त माना जाएगा।
नए कानून के अनुसार बनेगा नया बोर्ड
समाज कल्याण विभाग के आदेश में कहा गया है कि संशोधित केंद्रीय कानून के प्रावधानों को ध्यान में रखते हुए राज्य में बोर्ड का पुनर्गठन किया जाएगा। सरकार का कहना है कि नए बोर्ड में राज्य में रहने वाले ट्रांसजेंडर समुदाय के अलग-अलग वर्गों की भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी।इसका उद्देश्य ट्रांसजेंडर समुदाय के कल्याण से जुड़े मुद्दों को व्यापक प्रतिनिधित्व के साथ बोर्ड के माध्यम से उठाना बताया गया है। नए बोर्ड में किन लोगों को शामिल किया जाएगा और इसकी संरचना क्या होगी, इसकी जानकारी पुनर्गठन के दौरान सामने आएगी।
पटना में मोदी मंदिर बनाने की मांग को लेकर चर्चा में था बोर्ड
बिहार किन्नर कल्याण बोर्ड पिछले कुछ समय से एक अलग मांग को लेकर भी चर्चा में था। बोर्ड के सदस्यों ने पटना में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का मंदिर बनाने की मांग की थी।करीब आठ दिन पहले बोर्ड के कुछ सदस्यों ने दिल्ली के प्रेस क्लब में ‘मोदी चालीसा’ का पाठ भी किया था। इस दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी के प्रति अपनी आस्था और सम्मान व्यक्त करते हुए पटना में मंदिर बनाने की मांग रखी थी।
इस मांग के बाद बोर्ड राजनीतिक चर्चा का विषय भी बन गया था। हालांकि सरकार की ओर से बोर्ड को भंग करने के लिए जारी आदेश में इस मांग या दिल्ली में हुए कार्यक्रम का कोई उल्लेख नहीं किया गया है।
प्रतिनिधित्व बढ़ाने पर सरकार का जोर
सरकार के मुताबिक नए कानून में हुए बदलावों के बाद मौजूदा बोर्ड की संरचना को बदलना जरूरी हो गया है। नए बोर्ड के गठन में ट्रांसजेंडर समुदाय के अलग-अलग वर्गों की भागीदारी सुनिश्चित करने पर जोर दिया जाएगा।बोर्ड का मुख्य उद्देश्य ट्रांसजेंडर समुदाय के सामाजिक, आर्थिक और कल्याणकारी मुद्दों पर सरकार को सुझाव देना तथा संबंधित योजनाओं के क्रियान्वयन में सहयोग करना है। अब नए कानून के अनुरूप बनने वाला बोर्ड इन जिम्मेदारियों को आगे बढ़ाएगा।फिलहाल पुराने बोर्ड को भंग कर दिया गया है और उसके सभी सदस्यों का मनोनयन समाप्त हो चुका है। नए बोर्ड के गठन की प्रक्रिया और इसमें शामिल किए जाने वाले सदस्यों के नाम सरकार की आगामी अधिसूचना में स्पष्ट होंगे।

