बिहारशरीफ में आवारा कुत्तों के आतंक से मिलेगी राहत, नगर निगम ने शुरू किया सघन अभियान
बिहारशरीफ शहर की सड़कों और प्रमुख मोहल्लों में बढ़ते आवारा कुत्तों के आतंक से परेशान लोगों के लिए राहत की खबर है। शहर में लगातार बढ़ रही स्ट्रीट डॉग्स की संख्या और इनके कारण पैदा हो रही समस्याओं को नगर निगम प्रशासन ने गंभीरता से लिया है। नागरिकों की शिकायतों और बढ़ती परेशानी को देखते हुए नगर निगम ने आवारा कुत्तों को पकड़ने के लिए सघन अभियान शुरू कर दिया है।
शहर के कई इलाकों में लंबे समय से आवारा कुत्तों की संख्या बढ़ने की शिकायतें सामने आती रही हैं। मुख्य सड़कों, गलियों, बाजार क्षेत्रों और प्रमुख मोहल्लों में झुंड के रूप में घूमने वाले कुत्तों के कारण लोगों को आवाजाही में परेशानी का सामना करना पड़ता है। खासकर सुबह और देर शाम के समय सड़कों पर निकलने वाले लोगों के लिए स्थिति अधिक चुनौतीपूर्ण हो जाती है। बाइक सवारों के पीछे कुत्तों के दौड़ने और अचानक सड़क पर आ जाने से दुर्घटना का खतरा भी बना रहता है।
सबसे ज्यादा परेशानी बच्चों, बुजुर्गों और पैदल आने-जाने वाले लोगों को होती है। कई स्थानों पर आवारा कुत्तों के झुंड सड़क किनारे या गलियों में बैठे रहते हैं। इनके अचानक भौंकने या दौड़ने से लोग डर जाते हैं। स्थानीय नागरिक लंबे समय से नगर निगम से इस समस्या के समाधान की मांग कर रहे थे।
नगर निगम प्रशासन ने अब इस समस्या को गंभीरता से लेते हुए स्ट्रीट डॉग्स को पकड़ने की कार्रवाई शुरू की है। अभियान के तहत शहर के अलग-अलग हिस्सों में आवारा कुत्तों की पहचान कर उन्हें पकड़ने का काम किया जा रहा है। नगर निगम की टीम प्रमुख सड़कों और उन मोहल्लों पर विशेष ध्यान दे रही है, जहां कुत्तों की संख्या अधिक होने की शिकायतें सामने आई हैं।
प्रशासन का उद्देश्य केवल आवारा कुत्तों को सड़कों से हटाना ही नहीं, बल्कि शहर में नागरिकों की सुरक्षा और सार्वजनिक व्यवस्था को बेहतर बनाना भी है। अभियान के दौरान नियमों और निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन किए जाने की उम्मीद है। स्ट्रीट डॉग्स से जुड़ी समस्या का स्थायी समाधान तभी संभव होगा, जब पकड़ने की कार्रवाई के साथ उनकी नसबंदी और टीकाकरण जैसी व्यवस्थाओं पर भी प्रभावी तरीके से काम किया जाए।
नगर निगम के इस अभियान से शहरवासियों को उम्मीद है कि आने वाले दिनों में सड़कों और मोहल्लों में आवारा कुत्तों का आतंक कम होगा। नागरिकों का कहना है कि अभियान लगातार चलाया जाए और संवेदनशील इलाकों में नियमित निगरानी रखी जाए, ताकि समस्या दोबारा गंभीर रूप न ले सके। अब लोगों की नजर इस बात पर है कि नगर निगम का यह अभियान कितने प्रभावी तरीके से आगे बढ़ता है और शहर को आवारा कुत्तों की समस्या से कितनी राहत मिलती है।

