बिहार के सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों की मनमानी प्रतिनियुक्ति पर रोक, स्वास्थ्य विभाग का सख्त आदेश जारी
बिहार के सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों की मनमानी प्रतिनियुक्ति (डेपुटेशन) पर अब पूरी तरह लगाम लगा दी गई है। स्वास्थ्य विभाग ने इस पर सख्त रुख अपनाते हुए स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं, जिससे राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जा सके।
इस संबंध में स्वास्थ्य विभाग के सचिव कुमार रवि ने सभी जिलाधिकारियों (डीएम) को पत्र जारी किया है। इस पत्र में स्पष्ट कहा गया है कि अब किसी भी डॉक्टर की मनमानी तरीके से प्रतिनियुक्ति नहीं की जाएगी और सभी स्थानांतरण एवं तैनाती तय नियमों के अनुसार ही होंगे।
सरकारी अस्पतालों में लंबे समय से यह शिकायत मिल रही थी कि कुछ डॉक्टरों की तैनाती मनमाने तरीके से दूसरे स्थानों पर कर दी जाती थी, जिससे मूल अस्पतालों में चिकित्सकीय सेवाएं प्रभावित होती थीं। कई जिलों में मरीजों को समय पर इलाज नहीं मिल पाने की शिकायतें भी लगातार सामने आ रही थीं।
स्वास्थ्य विभाग के इस निर्णय को राज्य की चिकित्सा व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। विभाग का मानना है कि डॉक्टरों की स्थायी और नियोजित तैनाती से अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार होगा और मरीजों को बेहतर इलाज मिल सकेगा।
जारी आदेश में यह भी कहा गया है कि किसी भी स्तर पर नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई की जाएगी। साथ ही सभी जिलों को यह सुनिश्चित करने को कहा गया है कि अस्पतालों में डॉक्टरों की उपलब्धता बनी रहे और किसी भी स्थिति में सेवाएं बाधित न हों।
बिहार के कई सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी और बार-बार होने वाले स्थानांतरण को लेकर पहले भी सवाल उठते रहे हैं। ऐसे में यह आदेश व्यवस्था को स्थिर करने की दिशा में अहम माना जा रहा है।
स्वास्थ्य विभाग के इस फैसले से उम्मीद की जा रही है कि ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों के अस्पतालों में चिकित्सा सेवाएं बेहतर होंगी और मरीजों को समय पर इलाज मिल सकेगा।
फिलहाल सभी जिलों को इस आदेश का सख्ती से पालन करने के निर्देश दिए गए हैं, और स्वास्थ्य विभाग इसकी निगरानी खुद करेगा।

