बिहार में नई फिल्म प्रोत्साहन नीति लागू होने के बाद राज्य फिल्म निर्माण के क्षेत्र में तेजी से उभर रहा है। सरकार ने हाल ही में 45 फिल्मों की शूटिंग को मंजूरी दी है, जिससे बिहार अब फिल्म शूटिंग का नया हब बन गया है।
राज्य सरकार के अनुसार, इन 45 फिल्मों में हिंदी और क्षेत्रीय भाषाओं की फिल्में शामिल हैं। इनमें भोजपुरी, हिंदी, मगही और हिंदी-मैथिली जैसी भाषाओं की फिल्मों का निर्माण किया जाएगा। विस्तृत विवरण के अनुसार, 22 हिंदी, 19 भोजपुरी, एक मगही, एक अंग्रेजी एवं भोजपुरी मिश्रित, और एक हिंदी एवं मैथिली मिश्रित फिल्में शामिल हैं।
फिल्म प्रोत्साहन नीति का उद्देश्य राज्य में फिल्म निर्माण को बढ़ावा देना और स्थानीय कलाकारों और तकनीशियनों को अवसर प्रदान करना है। नीति के तहत फिल्म निर्माताओं को वित्तीय प्रोत्साहन, शूटिंग के दौरान आसान अनुमति और सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस पहल से बिहार की सिनेमा इंडस्ट्री को नई पहचान मिलेगी और स्थानीय अर्थव्यवस्था में भी सुधार आएगा। शूटिंग के लिए आने वाले फिल्मकर्मी होटल, कैटरिंग, परिवहन और अन्य सेवाओं का उपयोग करेंगे, जिससे स्थानीय व्यवसायों को भी फायदा होगा।
सरकारी सूत्रों के अनुसार, बिहार में शूटिंग की सुविधा देने के लिए विभिन्न जिलों में स्थानों की सूची तैयार की गई है। राज्य के ऐतिहासिक स्थल, प्राकृतिक सौंदर्य और ग्रामीण परिवेश को फिल्मों में दिखाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।
बिहार में फिल्म उद्योग को बढ़ावा देने की यह पहल राज्य की संस्कृति और भाषा को बढ़ावा देने में भी मदद करेगी। नीति के तहत स्थानीय कलाकारों, तकनीशियनों और शूटिंग लोकेशन को प्रोत्साहित किया जाएगा, जिससे राज्य की फिल्म इंडस्ट्री में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।
फिलहाल, 45 मंजूर फिल्में अगले कुछ महीनों में बिहार के विभिन्न जिलों में शूटिंग शुरू करेंगी। इस कदम को राज्य में फिल्म निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण और सकारात्मक पहल के रूप में देखा जा रहा है।

