बिहार में स्कूली बच्चों की सुरक्षा के लिए नया पोर्टल, 2 लाख से ज्यादा वाहनों का होगा डिजिटल रिकॉर्ड
बिहार में स्कूली बच्चों की सुरक्षा को लेकर परिवहन विभाग बड़ा कदम उठाने जा रहा है। राज्य में स्कूली वाहनों की निगरानी और व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने के लिए विभाग अगस्त महीने में एक विशेष पोर्टल लॉन्च करने की तैयारी कर रहा है। इस पोर्टल के माध्यम से राज्यभर में संचालित 2 लाख से अधिक स्कूली वाहनों का पूरा ब्योरा डिजिटल किया जाएगा।
परिवहन विभाग की इस पहल का उद्देश्य स्कूली वाहनों की जानकारी को एक ही प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराना और सुरक्षा मानकों की नियमित निगरानी करना है। पोर्टल के शुरू होने के बाद विभाग के पास प्रत्येक वाहन, चालक और संबंधित स्कूल की जानकारी ऑनलाइन उपलब्ध रहेगी।
नई व्यवस्था के तहत स्कूली वाहनों का रजिस्ट्रेशन, वाहन की फिटनेस, परमिट, बीमा, चालक का विवरण और अन्य जरूरी दस्तावेज डिजिटल रिकॉर्ड में दर्ज किए जाएंगे। इससे नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहनों की पहचान करना आसान होगा।
विभाग का मानना है कि डिजिटल रिकॉर्ड बनने से स्कूली वाहनों की जांच प्रक्रिया भी अधिक प्रभावी होगी। यदि किसी वाहन की फिटनेस खत्म हो जाती है या वह सुरक्षा मानकों पर खरा नहीं उतरता है तो उसकी जानकारी समय रहते मिल सकेगी और कार्रवाई की जा सकेगी।
स्कूल जाने वाले बच्चों की सुरक्षा लंबे समय से एक महत्वपूर्ण मुद्दा रहा है। कई बार खराब स्थिति वाले वाहन, प्रशिक्षित चालक की कमी या सुरक्षा नियमों की अनदेखी के कारण हादसों का खतरा बना रहता है। ऐसे में परिवहन विभाग की यह पहल बच्चों की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में अहम मानी जा रही है।
अधिकारियों के अनुसार, पोर्टल के जरिए स्कूल प्रबंधन को भी अपने वाहनों से जुड़ी जानकारी अपडेट करनी होगी। इससे विभाग को राज्यभर में चल रहे स्कूली वाहनों की वास्तविक संख्या और स्थिति की जानकारी मिल सकेगी।
इसके अलावा भविष्य में इस पोर्टल को अन्य सुविधाओं से जोड़ने की योजना भी बनाई जा सकती है, जिससे निगरानी व्यवस्था और बेहतर हो सके। परिवहन विभाग का लक्ष्य है कि सभी स्कूली वाहन निर्धारित सुरक्षा मानकों के अनुसार संचालित हों।
गौरतलब है कि बिहार में बड़ी संख्या में बच्चे रोजाना बस, वैन और अन्य निजी वाहनों से स्कूल पहुंचते हैं। ऐसे में इन वाहनों की सुरक्षा जांच और रिकॉर्ड को डिजिटल करना बच्चों के सुरक्षित सफर के लिए महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
अगस्त में पोर्टल लॉन्च होने के बाद राज्य के स्कूली परिवहन सिस्टम में पारदर्शिता बढ़ने और लापरवाही पर लगाम लगने की उम्मीद है। विभाग की यह पहल आने वाले समय में स्कूली बच्चों के सुरक्षित आवागमन में अहम भूमिका निभा सकती है।

