बिहार के सरकारी स्कूलों में अब क्षेत्रीय भाषाओं में होगी पढ़ाई, पहली से पांचवीं तक के बच्चों को भोजपुरी-मगही समेत कई भाषाएं पढ़ाई जाएंगी
बिहार के सरकारी स्कूलों में शिक्षा व्यवस्था को और बेहतर बनाने के लिए बड़ा बदलाव किया जा रहा है। अब कक्षा 1 से 5वीं तक के विद्यार्थियों को भोजपुरी, मगही, मैथिली, अंगिका सहित अन्य क्षेत्रीय भाषाओं में पढ़ाई कराई जाएगी। सरकार का उद्देश्य है कि बच्चे अपनी मातृभाषा और स्थानीय भाषा में आसानी से विषयों को समझ सकें और उनकी सीखने की क्षमता को बढ़ाया जा सके।
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि शुरुआती कक्षाओं में बच्चों को उनकी परिचित भाषा में पढ़ाने से सीखने की प्रक्रिया आसान हो जाती है। बच्चे अपनी भाषा में सवालों को बेहतर तरीके से समझ पाते हैं और पाठ को लंबे समय तक याद रख सकते हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए बिहार सरकार ने प्राथमिक शिक्षा में क्षेत्रीय भाषाओं को शामिल करने की पहल की है।
स्थानीय भाषा में मजबूत होगी बच्चों की समझ
प्राथमिक स्तर पर बच्चों का मानसिक विकास तेजी से होता है। इस उम्र में यदि उन्हें ऐसी भाषा में पढ़ाया जाए, जिसे वे घर और आसपास के माहौल में बोलते और समझते हैं, तो वे पढ़ाई में ज्यादा रुचि लेते हैं। क्षेत्रीय भाषाओं के माध्यम से पढ़ाई कराने से बच्चों में आत्मविश्वास भी बढ़ेगा और वे कक्षा में सक्रिय रूप से भाग ले सकेंगे।
बिहार में अलग-अलग क्षेत्रों में अलग-अलग भाषाओं का प्रचलन है। उत्तर बिहार में मैथिली, भोजपुर क्षेत्र में भोजपुरी, मगध क्षेत्र में मगही और अंग क्षेत्र में अंगिका प्रमुख रूप से बोली जाती है। अब इन भाषाओं को शिक्षा के माध्यम से बढ़ावा देने की तैयारी की जा रही है।
बच्चों को याद रखने में होगी आसानी
शिक्षा विभाग का मानना है कि जब बच्चे अपनी भाषा में किसी विषय को समझते हैं तो वह जानकारी उनके दिमाग में लंबे समय तक बनी रहती है। कठिन शब्दों और अवधारणाओं को स्थानीय भाषा में समझाने से बच्चों की सीखने की क्षमता बेहतर होती है।
इसके अलावा क्षेत्रीय भाषा के उपयोग से स्कूल और बच्चों के परिवारों के बीच भी बेहतर संवाद स्थापित हो सकेगा। अभिभावक भी बच्चों की पढ़ाई में ज्यादा आसानी से सहयोग कर पाएंगे।
मातृभाषा को बढ़ावा देने की पहल
नई शिक्षा नीति में भी शुरुआती शिक्षा को मातृभाषा या स्थानीय भाषा में देने पर जोर दिया गया है। इसी दिशा में बिहार में क्षेत्रीय भाषाओं को प्राथमिक शिक्षा से जोड़ने की पहल की जा रही है।
शिक्षा विभाग जल्द ही इसके लिए पाठ्य सामग्री तैयार करने और शिक्षकों को आवश्यक प्रशिक्षण देने की योजना बना सकता है। अधिकारियों का कहना है कि स्थानीय भाषाओं को शिक्षा से जोड़ने का मकसद बच्चों की नींव मजबूत करना और उन्हें बेहतर तरीके से सीखने का अवसर देना है।
बिहार सरकार की यह पहल न सिर्फ शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने में मदद करेगी, बल्कि राज्य की समृद्ध भाषाई संस्कृति को भी नई पहचान देगी।

