बिहार सरकार ने सरकारी अस्पतालों में दलालों और उनकी मिलीभगत को रोकने के लिए सख्त कदम उठाया है। इसके तहत राज्य सरकार ने ‘धावा दल’ गठित करने का निर्णय लिया है। इस पहल का उद्देश्य गरीब मरीजों को सरकारी अस्पतालों की सुविधाओं से वंचित होने से बचाना है।
स्वास्थ्य सचिव ने सभी जिलाधिकारियों को औचक निरीक्षण के निर्देश दिए हैं। अधिकारियों को आदेश दिया गया है कि वे अस्पतालों में कर्मचारियों और डॉक्टरों की गतिविधियों पर नजर रखें और सुनिश्चित करें कि कोई मरीज अनावश्यक रूप से निजी अस्पतालों में न भेजा जाए।
इस योजना के तहत, मरीजों को निजी अस्पतालों में भेजने वाले दलालों और उनके सहयोगियों पर कठोर कार्रवाई की जाएगी। इसके लिए राज्य और जिला स्तर पर नोडल अधिकारी नियुक्त किए गए हैं। ये अधिकारी दैनिक कार्रवाई की समीक्षा करेंगे और अस्पतालों में नियमों के पालन को सुनिश्चित करेंगे।
स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों ने बताया कि 'धावा दल' का गठन अस्पतालों में पारदर्शिता बढ़ाने और मरीजों के हित में निर्णय लेने के उद्देश्य से किया गया है। अधिकारियों को अधिकार दिए गए हैं कि वे सभी अनियमितताओं की तुरंत रिपोर्ट करें और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई सुनिश्चित करें।
विशेषज्ञों का कहना है कि सरकारी अस्पतालों में दलालों की सक्रियता अक्सर गरीब मरीजों को सुविधाओं से वंचित करती है और उन्हें अनावश्यक खर्च में डालती है। इस कदम से उम्मीद है कि सिस्टम में सुधार और मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी।
स्थानीय मरीजों और नागरिकों ने इस पहल का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि अस्पतालों में भ्रष्टाचार और दलालों की सक्रियता लंबे समय से चिंता का विषय रही है। ‘धावा दल’ के गठन से मरीजों को सरकारी सुविधाओं का लाभ मिलने में आसानी होगी और गरीब लोग अनावश्यक रूप से निजी अस्पतालों पर निर्भर नहीं रहेंगे।
सरकार ने बताया कि ‘धावा दल’ राज्य के सभी सरकारी अस्पतालों में प्रभावी ढंग से कार्य करेगा। दलालों और मिलीभगत करने वाले डॉक्टर-कर्मचारियों पर न केवल सख्त कार्रवाई की जाएगी, बल्कि उन्हें कानूनी रूप से भी जवाबदेह ठहराया जाएगा।
कुल मिलाकर, बिहार सरकार का यह कदम गरीब मरीजों के अधिकारों की सुरक्षा और सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था में पारदर्शिता और अनुशासन बढ़ाने के उद्देश्य से लिया गया है। अब राज्य और जिला स्तर पर नोडल अधिकारी और ‘धावा दल’ नियमित निरीक्षण और कार्रवाई करेंगे, जिससे अस्पतालों में किसी भी तरह की अनियमितता और दलालों की सक्रियता को रोका जा सके।

