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बिहार कैबिनेट बैठक: सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में 63 एजेंडों पर मुहर, विकास और प्रशासनिक सुधार पर बड़ा फोकस

बिहार कैबिनेट बैठक: सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में 63 एजेंडों पर मुहर, विकास और प्रशासनिक सुधार पर बड़ा फोकस

बिहार में नई सरकार के गठन के बाद मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में हुई दूसरी कैबिनेट बैठक में राज्य के विकास और प्रशासनिक सुधार से जुड़े कई अहम फैसले लिए गए। इस बैठक में कुल 63 एजेंडों को मंजूरी दी गई, जिससे राज्य में बुनियादी ढांचे, बिजली, सड़क, स्वास्थ्य और प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में बड़े कदम उठाए गए हैं।

मुख्यमंत्री सचिवालय में आयोजित इस बैठक में उपमुख्यमंत्री और सभी विभागों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। बैठक को सरकार की अब तक की सबसे महत्वपूर्ण बैठकों में से एक माना जा रहा है, जिसमें कई लंबित और नई योजनाओं को हरी झंडी दी गई।

सड़क और इंफ्रास्ट्रक्चर पर बड़ा जोर

बैठक में राज्य की कनेक्टिविटी सुधारने के लिए कई बड़ी सड़क और पुल परियोजनाओं को मंजूरी दी गई। बक्सर-आरा-मनेर गंगा पथ सहित कई महत्वपूर्ण ग्रीनफील्ड और फोरलेन परियोजनाओं को आगे बढ़ाने का निर्णय लिया गया है। इसके अलावा गया में फल्गु नदी पर नया पुल बनाने की भी स्वीकृति दी गई है, जिससे स्थानीय आवागमन में सुधार होगा।

बिजली और विकास योजनाओं को बढ़ावा

राज्य में बिजली आपूर्ति को मजबूत करने के लिए ट्रांसमिशन नेटवर्क विस्तार और सब्सिडी योजनाओं पर बड़ा बजट स्वीकृत किया गया है। मुख्यमंत्री विद्युत उपभोक्ता सहायता योजना के तहत भारी वित्तीय प्रावधान किए गए हैं ताकि आम उपभोक्ताओं को राहत मिल सके।

शिक्षा और रोजगार पर फोकस

बैठक में शिक्षा क्षेत्र को मजबूत करने के लिए नए मॉडल स्कूल और कॉलेजों के विस्तार की योजनाओं को भी मंजूरी मिली है। इसके साथ ही हजारों नए पदों के सृजन से रोजगार के अवसर बढ़ाने की दिशा में कदम उठाए गए हैं। सरकार का लक्ष्य युवाओं को राज्य में ही बेहतर अवसर उपलब्ध कराना है।

प्रशासनिक और पुलिस सुधार

प्रशासनिक ढांचे को अधिक प्रभावी बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए हैं। पुलिस विभाग में पदोन्नति और भर्ती प्रक्रिया से जुड़े प्रस्तावों को मंजूरी दी गई है, जिससे सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया जा सके।

अन्य महत्वपूर्ण फैसले

बैठक में नगर निकायों के बिजली बिल भुगतान, सफाई कर्मचारी आयोग के गठन और जल आपूर्ति योजनाओं के रखरखाव जैसे मुद्दों पर भी निर्णय लिए गए। इसके साथ ही कई पुराने प्रशासनिक ढांचे में बदलाव कर उन्हें अधिक आधुनिक और प्रभावी बनाने पर जोर दिया गया।

राजनीतिक और प्रशासनिक संकेत

विशेषज्ञों के अनुसार यह बैठक सरकार की विकास-उन्मुख नीति और तेज प्रशासनिक फैसलों का संकेत देती है। सरकार का फोकस अब बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स और जनकल्याण योजनाओं के तेजी से क्रियान्वयन पर है।

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