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बिहार बोर्ड ने परीक्षा सुरक्षा में डिजिटल स्ट्राइक का ऐलान, मोबाइल ऐप से होगी रियल-टाइम निगरानी

बिहार बोर्ड ने परीक्षा सुरक्षा में डिजिटल स्ट्राइक का ऐलान, मोबाइल ऐप से होगी रियल-टाइम निगरानी

बिहार विद्यालय परीक्षा समिति (BSEB) ने इस वर्ष की मैट्रिक और इंटरमीडिएट परीक्षाओं को पूरी तरह पारदर्शी और कदाचारमुक्त बनाने के लिए व्यापक तैयारी शुरू कर दी है। बोर्ड ने परीक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए तकनीक का सहारा लेने का निर्णय लिया है और इस दिशा में एक विशेष एग्जामिनेशन मोबाइल ऐप लॉन्च किया गया है। इस ऐप के माध्यम से राज्य के हजारों परीक्षा केंद्रों की रियल-टाइम निगरानी की जाएगी।

सूत्रों के अनुसार, बोर्ड इस बार किसी भी प्रकार के अनुचित प्रथा या नकल को रोकने के लिए डिजिटल स्ट्राइक करने वाला है। परीक्षा केंद्रों में तैनात पर्यवेक्षकों को यह ऐप उपलब्ध कराया जाएगा, जिसके जरिए वे केंद्र पर हो रही गतिविधियों की लाइव रिपोर्ट सीधे मुख्यालय तक भेज सकेंगे। इसके अलावा, कैमरा फीड, विद्यार्थियों की उपस्थिति, प्रश्न-पत्र की सुरक्षा और अन्य नियमों का पालन भी मोबाइल ऐप के माध्यम से मॉनिटर किया जाएगा।

बीएसईबी अध्यक्ष ने बताया कि पिछले वर्षों में कई केंद्रों पर अनियमितताएँ सामने आई थीं, जिन्हें रोकने के लिए अब बोर्ड ने तकनीकी पहल शुरू की है। उन्होंने कहा, “हम चाहते हैं कि विद्यार्थी पूरी ईमानदारी और पारदर्शिता के साथ अपनी परीक्षा दें। इस बार किसी भी तरह के नकल या अन्य गड़बड़ी की गुंजाइश नहीं रहेगी।”

इस ऐप की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह रियल-टाइम डेटा भेजता है, जिससे बोर्ड अधिकारियों को किसी भी केंद्र पर समस्या का तुरंत पता चल सके। साथ ही, यह ऐप पर्यवेक्षकों को केंद्र की स्थिति रिपोर्ट करने, विद्यार्थियों की संख्या दर्ज करने और किसी भी आपात स्थिति में तत्काल अलर्ट भेजने की सुविधा भी देता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की डिजिटल निगरानी से न केवल परीक्षा की पारदर्शिता बढ़ेगी, बल्कि विद्यार्थियों और अभिभावकों का भरोसा भी मजबूत होगा। यह कदम बीएसईबी द्वारा परीक्षा के हर पहलू में सुधार और तकनीकी नवाचार को लागू करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास माना जा रहा है।

परीक्षा केंद्रों की डिजिटल निगरानी के अलावा बोर्ड ने इस बार सख्त नियम और निर्देश भी जारी किए हैं। परीक्षा शुरू होने से पहले प्रत्येक केंद्र की तैयारी, कक्षाओं की संख्या, विद्यार्थियों की सूची और प्रश्न-पत्रों की सुरक्षा की पूरी जांच की जाएगी। बोर्ड का यह प्रयास बिहार में शिक्षा व्यवस्था में ईमानदारी और अनुशासन की एक नई मिसाल कायम करने की दिशा में कदम है।

इस पहल से उम्मीद की जा रही है कि राज्य में परीक्षा प्रक्रिया पूरी तरह से पारदर्शी और भ्रष्टाचार-मुक्त होगी और भविष्य में अन्य शिक्षा बोर्ड भी इस मॉडल को अपनाने पर विचार कर सकते हैं।

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