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बिहार विधानसभा में विधायकों को मिली AI और डिजिटल तकनीक की ट्रेनिंग, तकनीकी रूप से सक्षम बनाने की पहल

बिहार विधानसभा में विधायकों को मिली AI और डिजिटल तकनीक की ट्रेनिंग, तकनीकी रूप से सक्षम बनाने की पहल

बिहार विधानमंडल के विस्तारित भवन में बुधवार को विधायकों के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और डिजिटल तकनीक पर विशेष प्रबोधन एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य जनप्रतिनिधियों को बदलते तकनीकी दौर के साथ जोड़ना और डिजिटल संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल के लिए प्रशिक्षित करना था।

कार्यक्रम में विधायकों को बताया गया कि किस तरह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और आधुनिक डिजिटल तकनीकों का उपयोग प्रशासनिक कार्यों, जनसमस्याओं के समाधान और बेहतर निर्णय लेने में किया जा सकता है। विशेषज्ञों ने AI के बढ़ते प्रभाव और इसके व्यावहारिक उपयोगों के बारे में विस्तार से जानकारी दी।

प्रशिक्षण सत्र के दौरान विधायकों को डिजिटल प्लेटफॉर्म, ऑनलाइन सेवाओं, डेटा प्रबंधन और तकनीक आधारित कार्यप्रणाली से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां दी गईं। विशेषज्ञों ने बताया कि आने वाले समय में तकनीक की भूमिका शासन और नीति निर्माण में और अधिक बढ़ने वाली है। ऐसे में जनप्रतिनिधियों का तकनीकी रूप से दक्ष होना जरूरी है।

कार्यक्रम में AI के लाभ और चुनौतियों पर भी चर्चा की गई। वक्ताओं ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग पारदर्शिता बढ़ाने, काम को आसान बनाने और समय की बचत करने में किया जा सकता है। हालांकि, इसके इस्तेमाल के दौरान डेटा सुरक्षा और गोपनीयता का ध्यान रखना भी आवश्यक है।

विधायकों को यह भी बताया गया कि डिजिटल माध्यमों के जरिए वे अपने क्षेत्र की समस्याओं, योजनाओं और विकास कार्यों की निगरानी को और प्रभावी बना सकते हैं। तकनीक के इस्तेमाल से जनता के साथ संवाद को भी बेहतर बनाया जा सकता है।

इस अवसर पर विधानसभा के अधिकारियों और तकनीकी विशेषज्ञों ने विधायकों के सवालों के जवाब दिए। कई विधायकों ने AI और डिजिटल तकनीक को लेकर अपनी जिज्ञासाएं साझा कीं और इसके उपयोग से जुड़े पहलुओं को समझा।

कार्यक्रम को लेकर कहा गया कि यह पहल बिहार विधानमंडल को आधुनिक तकनीकी परिवेश के अनुरूप तैयार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। डिजिटल युग में जनप्रतिनिधियों को तकनीकी ज्ञान से लैस करने से न केवल उनके कामकाज में सुधार आएगा, बल्कि जनता तक सरकारी योजनाओं और सेवाओं की पहुंच भी अधिक प्रभावी हो सकेगी।

बिहार विधानमंडल की ओर से इस तरह के प्रशिक्षण कार्यक्रम भविष्य में भी आयोजित किए जाने की संभावना है, ताकि विधायक नई तकनीकों से लगातार अपडेट रह सकें और बदलते समय की जरूरतों के अनुसार अपनी भूमिका को और मजबूत कर सकें।

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