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बिहार विधानसभा में नीतीश कुमार और आरजेडी विधायक के बीच तीखी बहस, लाठीचार्ज मुद्दे पर गर्माई राजनीति

बिहार विधानसभा में नीतीश कुमार और आरजेडी विधायक के बीच तीखी बहस, लाठीचार्ज मुद्दे पर गर्माई राजनीति

बिहार विधानसभा में आज एक बार फिर विपक्ष और सरकार के बीच हंगामा देखने को मिला। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और आरजेडी विधायक भाई वीरेंद्र के बीच सदन में तीखी बहस हुई, जिसने विधानसभा के माहौल को तनावपूर्ण बना दिया।

सदन की कार्यवाही शुरू होते ही आरजेडी विधायक कुमार सर्वजीत ने कल की एक घटना का मुद्दा उठाया, जिसमें चौकीदारों पर लाठीचार्ज किया गया था। इस मुद्दे को लेकर विपक्षी विधायक नारेबाजी करने लगे। उन्होंने जोरदार स्वर में नारे लगाए, जिनमें प्रमुख नारा था: “लाठी गोली की सरकार नहीं चलेगी, नहीं चलेगी।”

विपक्ष की इस नारेबाजी का जवाब देने के लिए सरकार की ओर से मंत्री विजय चौधरी ने सदन में उठकर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि यदि सरकार नहीं चलेगी तो चौकीदारों की आवाज़ और उनकी सुरक्षा का ख्याल कौन रखेगा। मंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि कानून और व्यवस्था बनाए रखना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है और इसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

विपक्ष के विधायकों ने लाठीचार्ज की घटना को पुलिस और प्रशासनिक दमन के रूप में प्रस्तुत किया और मुख्यमंत्री से जवाब मांगा। इस दौरान सदन में काफी देर तक हंगामा चलता रहा, और सभापति को कई बार हस्तक्षेप कर दोनों पक्षों को शांत कराने का प्रयास करना पड़ा।

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यह बहस राज्य में कानून और व्यवस्था, सरकारी कार्रवाई और विपक्ष के प्रदर्शन की गूंज को दर्शाती है। विपक्ष के अनुसार, चौकीदारों और आम जनता पर किए गए लाठीचार्ज ने प्रशासनिक कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। वहीं, सरकार का कहना है कि इस तरह की कार्रवाई शांति बनाए रखने और कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक थी।

सदन में हुई इस बहस ने राज्य की राजनीतिक गर्माहट को और बढ़ा दिया है। विपक्ष ने विधानसभा के बहस के दौरान सरकार के खिलाफ तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की और कहा कि यदि जनता की आवाज़ को दबाया गया, तो इसका प्रभाव आगामी चुनावों में देखने को मिलेगा।

इस बीच, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपनी शांत प्रतिक्रिया में कहा कि सरकार का ध्यान कानून, व्यवस्था और नागरिक सुरक्षा पर है। उन्होंने सभी विधायकों से सदन की मर्यादा बनाए रखने की अपील की।

विशेषज्ञों का मानना है कि विधानसभा में इस प्रकार की बहसें लोकतंत्र का हिस्सा हैं और विपक्ष द्वारा उठाए गए मुद्दों पर सरकार की प्रतिक्रिया भी महत्वपूर्ण है। हालांकि, इन बहसों के दौरान यदि हंगामा बढ़ता है, तो संसद की कार्यवाही प्रभावित होती है और राज्य की जनता को सूचना प्राप्त करने में बाधा आती है।

आज की विधानसभा में हुई यह बहस स्पष्ट रूप से यह दर्शाती है कि बिहार की राजनीति में कानून व्यवस्था और प्रशासनिक कार्रवाई हमेशा संवेदनशील मुद्दा रही है। यह घटना आने वाले दिनों में राजनीतिक विमर्श और मीडिया चर्चा का मुख्य विषय बनी रहेगी।

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