मुख्यमंत्री उद्यमी योजना में बड़ा खुलासा, 3000 लाभुकों पर कार्रवाई की तैयारी, उपयोगिता प्रमाण पत्र नहीं देने से बढ़ी मुश्किलें
मुख्यमंत्री उद्यमी योजना के तहत बिजनेस शुरू करने वाले हजारों लाभुकों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। सामने आई जानकारी के अनुसार करीब 3000 लाभुक ऐसे हैं जिन्होंने सरकार से योजना की दूसरी किस्त की राशि प्राप्त कर ली है, लेकिन अब तक उसका उपयोगिता प्रमाण पत्र (Utilization Certificate) जमा नहीं किया है।
इस लापरवाही के चलते संबंधित लाभुकों पर अब प्रशासनिक कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है। विभागीय स्तर पर ऐसे मामलों की समीक्षा शुरू कर दी गई है, और जिन लाभुकों ने तय समय सीमा के भीतर दस्तावेज जमा नहीं किए हैं, उनसे राशि की वसूली या आगे की सहायता रोकने जैसे कदम उठाए जा सकते हैं।
यह पूरा मामला मुख्यमंत्री उद्यमी योजना से जुड़ा है, जिसका उद्देश्य राज्य के बेरोजगार युवाओं को स्वरोजगार के लिए आर्थिक सहायता प्रदान करना है। इस योजना के तहत लाभुकों को व्यवसाय शुरू करने के लिए चरणबद्ध तरीके से वित्तीय सहायता दी जाती है।
सूत्रों के अनुसार, कई लाभुकों ने दूसरी किस्त की राशि तो प्राप्त कर ली, लेकिन निर्धारित नियमों के अनुसार उसका सही उपयोग दर्शाने वाला प्रमाण पत्र विभाग को नहीं सौंपा। इस वजह से यह स्पष्ट नहीं हो पा रहा है कि राशि का उपयोग वास्तव में व्यवसाय के लिए किया गया या नहीं।
विभागीय अधिकारियों का कहना है कि योजना में पारदर्शिता बनाए रखना बेहद जरूरी है, ताकि सरकारी धन का दुरुपयोग न हो और वास्तविक लाभार्थियों को ही इसका फायदा मिल सके। इसी कारण अब सख्ती बरतने की तैयारी की जा रही है।
बिहार सरकार ने संकेत दिए हैं कि ऐसे सभी लाभुकों की सूची तैयार की जा रही है जिन्होंने नियमों का पालन नहीं किया है। उन्हें नोटिस भेजकर जल्द से जल्द दस्तावेज जमा करने का निर्देश दिया जाएगा। तय समय में अनुपालन नहीं करने पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की सख्ती से योजना की विश्वसनीयता बढ़ेगी और भविष्य में लाभुकों द्वारा नियमों का पालन करने की प्रवृत्ति भी मजबूत होगी। साथ ही यह भी सुनिश्चित होगा कि सरकारी सहायता का सही उपयोग हो।
फिलहाल विभाग ने सभी जिला स्तर पर समीक्षा शुरू कर दी है और रिपोर्ट तैयार की जा रही है। आने वाले दिनों में इस मामले में बड़ा प्रशासनिक कदम देखने को मिल सकता है।

