बिहार पुलिस भर्ती में बड़ा बदलाव: थर्ड जेंडर उम्मीदवारों को भी मिला समान अवसर
देश में समावेशिता और समान अवसरों की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए बिहार पुलिस ने अब थर्ड जेंडर (तीसरे लिंग) के उम्मीदवारों को भी भर्ती प्रक्रिया में शामिल करना शुरू कर दिया है। यह पहल पुरुष और महिला उम्मीदवारों की तरह थर्ड जेंडर कैंडिडेट्स को भी समान अवसर प्रदान करने की दिशा में एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है। बिहार में यह व्यवस्था प्रभावी रूप से लागू हो चुकी है, जबकि मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में इस दिशा में अभी प्रक्रिया जारी है।
बिहार पुलिस की इस नई व्यवस्था के तहत थर्ड जेंडर उम्मीदवारों को भी अन्य श्रेणियों के अभ्यर्थियों के समान ही चयन प्रक्रिया से गुजरना होगा। इसमें शारीरिक दक्षता परीक्षा (Physical Efficiency Test) के साथ-साथ लिखित परीक्षा और अन्य चयन चरण शामिल हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम न केवल सामाजिक समावेशन को बढ़ावा देगा, बल्कि पुलिस बल में विविधता भी लाएगा।
बात करें बिहार पुलिस एसआई (सब-इंस्पेक्टर) भर्ती की तो थर्ड जेंडर उम्मीदवारों के लिए शारीरिक परीक्षा में पुरुष और महिला वर्ग की तरह ही निर्धारित मानकों का पालन किया जाता है। दौड़ की बात करें तो सामान्यतः उम्मीदवारों को तय समय के भीतर निश्चित दूरी पूरी करनी होती है। हालांकि, थर्ड जेंडर अभ्यर्थियों के लिए मानक पुरुष और महिला के बीच संतुलित रखे जाते हैं, ताकि उन्हें भी समान अवसर मिल सके।
उदाहरण के तौर पर, पुरुष अभ्यर्थियों के लिए 1.6 किलोमीटर की दौड़ तय समय में पूरी करनी होती है, जबकि महिला अभ्यर्थियों के लिए यह दूरी और समय अलग निर्धारित होता है। थर्ड जेंडर उम्मीदवारों के लिए इन मानकों को विशेष रूप से निर्धारित किया गया है, जिससे उनकी शारीरिक क्षमता और सामाजिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए उन्हें उचित अवसर मिल सके।
इस फैसले को सामाजिक कार्यकर्ताओं और मानवाधिकार संगठनों ने एक सकारात्मक कदम बताया है। उनका कहना है कि इससे थर्ड जेंडर समुदाय को मुख्यधारा में आने का मौका मिलेगा और उनके लिए रोजगार के नए रास्ते खुलेंगे। वहीं, कई विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि यह निर्णय समाज में समानता और सम्मान की भावना को मजबूत करेगा।
हालांकि, अभी मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में थर्ड जेंडर के लिए पुलिस भर्ती में समान व्यवस्था लागू करने की प्रक्रिया चल रही है। इन राज्यों में भी जल्द ही इस दिशा में ठोस कदम उठाए जाने की उम्मीद है।
कुल मिलाकर, बिहार पुलिस की यह पहल न केवल प्रशासनिक स्तर पर एक सुधार है, बल्कि यह समाज में समान अधिकारों और अवसरों की दिशा में एक प्रेरणादायक उदाहरण भी पेश करती है। यह कदम आने वाले समय में अन्य राज्यों के लिए भी एक मिसाल बन सकता है, जिससे पूरे देश में समावेशी विकास को बढ़ावा मिलेगा।

