बंजर जमीन पर उगाया 'हरा सोना', भीलवाड़ा के किसान ने 20 बीघा में तैयार किया बांस फार्म; CA बेटे के सुझाव ने बदली किस्मत
राजस्थान के भीलवाड़ा जिले के पारोली गांव के किसान महावीर काबरा ने पारंपरिक खेती से हटकर ऐसा प्रयोग किया है, जो अब क्षेत्र के किसानों के लिए प्रेरणा बन गया है। उन्होंने अपनी 20 बीघा बंजर और अम्लीय (एसिडिक) जमीन पर बांस (बैंबू) की व्यावसायिक खेती शुरू कर एक सफल बांस फार्म विकसित किया है। यह पहल न केवल कृषि विविधीकरण का बेहतरीन उदाहरण है, बल्कि अनुपयोगी मानी जाने वाली जमीन को भी आय का जरिया बनाने की मिसाल बन गई है।
महावीर काबरा के इस नवाचार के पीछे उनके चार्टर्ड अकाउंटेंट (सीए) बेटे की अहम भूमिका रही। बेटे ने पुणे में बांस की व्यावसायिक खेती की सफलता देखी और पिता को भी इसी दिशा में कदम बढ़ाने की सलाह दी। परिवार ने इस सुझाव पर गंभीरता से काम किया और आज इसका सकारात्मक परिणाम सामने है।
बंजर जमीन बनी कमाई का जरिया
जिस जमीन पर पहले पारंपरिक फसलें उगाना मुश्किल माना जाता था, आज वहीं पर बांस के पौधे लहलहा रहे हैं। अम्लीय और बंजर भूमि पर बांस की खेती कर महावीर काबरा ने यह साबित कर दिया कि सही योजना और आधुनिक सोच के साथ खेती में नए प्रयोग कर बेहतर आय हासिल की जा सकती है।
CA बेटे की सलाह बनी सफलता की कुंजी
महावीर काबरा के बेटे ने पुणे में बांस की खेती का मॉडल देखा था। वहां किसानों को इस खेती से अच्छा मुनाफा मिलता देख उन्होंने अपने पिता को भी इसे अपनाने का सुझाव दिया। शुरुआत में परिवार ने खेती की तकनीक, पौधों की गुणवत्ता और बाजार की संभावनाओं पर अध्ययन किया। इसके बाद 20 बीघा भूमि पर बांस के पौधे लगाए गए।
कृषि विविधीकरण की मिसाल
बांस की खेती को भविष्य की लाभकारी खेती माना जा रहा है। इसका उपयोग फर्नीचर, कागज उद्योग, निर्माण कार्य, सजावटी वस्तुओं और कई अन्य उद्योगों में होता है। लगातार बढ़ती मांग के कारण किसानों के लिए यह बेहतर आय का विकल्प बन रहा है।
महावीर काबरा का यह प्रयास क्षेत्र के अन्य किसानों को भी नई फसलों की ओर प्रेरित कर रहा है। कृषि विशेषज्ञों का भी मानना है कि जलवायु परिवर्तन और बदलती कृषि परिस्थितियों को देखते हुए किसानों को पारंपरिक खेती के साथ वैकल्पिक फसलों पर भी ध्यान देना चाहिए।
दूसरे किसानों के लिए प्रेरणा
महावीर काबरा का बांस फार्म अब आसपास के किसानों के लिए आकर्षण का केंद्र बन गया है। कई किसान उनके फार्म का दौरा कर बांस की खेती की तकनीक और इससे होने वाले लाभ की जानकारी ले रहे हैं।
कृषि क्षेत्र में यह पहल साबित करती है कि यदि किसान नई तकनीक और बाजार की मांग के अनुरूप खेती करें, तो बंजर जमीन भी 'हरा सोना' उगल सकती है। भीलवाड़ा के इस किसान की सफलता अब पूरे क्षेत्र में कृषि नवाचार की मिसाल बन चुकी है।

