पूर्वी बिहार और सीमांचल की जीवनरेखा माना जाने वाला विक्रमशिला सेतु अब गंभीर संकट में है। वर्षों से भारी ट्रैफिक और रखरखाव की कमी से जूझ रहे इस पुल की स्थिति हालिया हादसे के बाद और भी चिंताजनक हो गई है। 4 मई 2026 को सेतु के एक हिस्से के गिरने की घटना ने इलाके की कनेक्टिविटी और जनजीवन पर बड़ा असर डाला है।
यह पुल लंबे समय से भागलपुर को आसपास के जिलों से जोड़ने में अहम भूमिका निभाता रहा है। रोजाना हजारों वाहन इस पर से गुजरते हैं, लेकिन लगातार बढ़ते दबाव और कथित रूप से कमजोर होती संरचना ने इसकी स्थिति को जर्जर बना दिया था।
हादसे के बाद स्थानीय प्रशासन और इंजीनियरिंग टीमों ने मौके पर पहुंचकर निरीक्षण शुरू कर दिया है। प्रभावित हिस्से को बंद कर दिया गया है और ट्रैफिक को वैकल्पिक मार्गों से डायवर्ट किया जा रहा है। इससे आम लोगों, व्यापारियों और यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि पुल की मरम्मत और देखरेख को लेकर लंबे समय से लापरवाही बरती जा रही थी, जिसकी चेतावनी पहले भी दी जाती रही थी। हालांकि अब इस घटना के बाद सुरक्षा और संरचनात्मक मजबूती पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, पूरे पुल का तकनीकी ऑडिट कराया जा रहा है ताकि यह पता लगाया जा सके कि नुकसान कितना व्यापक है और आगे की मरम्मत या पुनर्निर्माण की आवश्यकता कितनी है। फिलहाल पुल पर भारी वाहनों की आवाजाही पूरी तरह रोक दी गई है।
भागलपुर और आसपास के क्षेत्रों में इस हादसे का सीधा असर देखने को मिल रहा है। स्कूल, ऑफिस और व्यापारिक गतिविधियों पर भी इसका प्रभाव पड़ा है, क्योंकि लोगों को अब लंबा वैकल्पिक रास्ता अपनाना पड़ रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के महत्वपूर्ण पुलों की नियमित निगरानी और समय पर मरम्मत बेहद जरूरी है, ताकि ऐसी घटनाओं से बचा जा सके। फिलहाल प्रशासन स्थिति को सामान्य करने और यातायात बहाल करने के प्रयासों में जुटा है।

