भागलपुर जिले ने जननी सुरक्षा योजना में बिहार में पहला स्थान हासिल किया, 3,218 प्रसूताओं को सीधे लाभ राशि पहुंचाई
बिहार के भागलपुर जिले ने जननी सुरक्षा योजना के तहत प्रसूताओं को लाभ पहुंचाने में राज्य में सबसे आगे का स्थान हासिल किया है। जिले के अधिकारियों ने बताया कि इस योजना के तहत अब तक 3,218 प्रसूताओं के बैंक खातों में सीधे लाभ राशि भेजी जा चुकी है। वहीं 37,134 लाभार्थियों की आईडी भी बनाई जा चुकी हैं, जिससे योजना के दायरे में और अधिक महिलाओं को जोड़ा जा सके।
जिला प्रशासन ने यह उपलब्धि पिछले साल लंबित भुगतान की प्रक्रिया को तेज करने के लिए किए गए प्रयासों का परिणाम बताया है। जिला लेखा प्रबंधक के निरंतर प्रयासों से ग्रामीण क्षेत्रों में ₹1,400 और शहरी क्षेत्रों में ₹1,000 का भुगतान सुनिश्चित किया गया। इस कदम से खासकर ग्रामीण इलाकों में माताओं को स्वास्थ्य सेवाओं और आर्थिक सहायता मिलना आसान हो गया है।
जननी सुरक्षा योजना का उद्देश्य गर्भवती महिलाओं और प्रसूताओं को सुरक्षित प्रसव और वित्तीय मदद उपलब्ध कराना है। भागलपुर जिले ने इस योजना के लाभार्थियों तक समय पर और पारदर्शी तरीके से राशि पहुंचाकर एक मिसाल कायम की है। अधिकारियों का कहना है कि योजना का लाभ सीधे बैंक खातों में भेजने से भ्रष्टाचार और धोखाधड़ी की संभावनाएं भी कम हो गई हैं।
जिले के मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी ने बताया कि जननी सुरक्षा योजना के अंतर्गत महिलाओं को केवल आर्थिक मदद ही नहीं, बल्कि प्रसव के दौरान बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं का भी लाभ मिलता है। इस योजना से महिलाओं की मातृत्व सुरक्षा और स्वास्थ्य में सुधार हुआ है।
भागलपुर जिला प्रशासन की इस सफलता को राज्य सरकार ने भी सराहा है। राज्य स्वास्थ्य विभाग ने जिले को उदाहरण बताते हुए कहा है कि अन्य जिलों को भी इस मॉडल का पालन करना चाहिए, ताकि पूरे बिहार में गर्भवती और प्रसूता महिलाओं को योजना का वास्तविक लाभ मिल सके।
विशेषज्ञों का कहना है कि जिले की इस उपलब्धि में योजना के डिजिटलीकरण, लाभार्थियों की पहचान और बैंक खातों में राशि सीधे भेजने की प्रक्रिया ने अहम भूमिका निभाई है। इससे योजना का लाभ तुरंत और पारदर्शी तरीके से महिलाओं तक पहुंचा, जो जननी सुरक्षा योजना के उद्देश्य को साकार करने में महत्वपूर्ण है।
भागलपुर जिले की यह पहल बिहार में माताओं और नवजात शिशुओं के स्वास्थ्य और सुरक्षा के क्षेत्र में एक प्रेरणादायक उदाहरण बन चुकी है। जिला प्रशासन ने यह भी आश्वासन दिया है कि भविष्य में भी योजना को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए हर संभव कदम उठाए जाएंगे, ताकि हर गर्भवती महिला और प्रसूता सुरक्षित और समर्थ बन सके।

