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राज्यसभा द्विवार्षिक चुनाव में सीटों से ज्यादा महत्व संतुलन बनाए रखने का, क्या बिहार-महाराष्ट्र में सहयोगी बिगाड़ेंगे BJP का खेल

राज्यसभा चुनावः NDA के सामने विपक्ष नहीं आपसी ‘एकता’ चुनौती, क्या बिहार-महाराष्ट्र में सहयोगी बिगाड़ेंगे BJP का खेल

आगामी राज्यसभा द्विवार्षिक चुनाव से एनडीए और इंडिया ब्लॉक के बीच सियासी समीकरण बदल सकते हैं। विश्लेषकों का मानना है कि इस बार चुनाव में सीटों की संख्या से ज्यादा मायने संतुलन और रणनीति का रखती है। विश्लेषण के अनुसार, एनडीए को इस चुनाव से 3 से 4 अतिरिक्त सीटों का फायदा हो सकता है। वहीं, इंडिया ब्लॉक 3 से 4 सीटों की हानि झेल सकता है। यदि बीजेपी अकेले ही अपनी संख्या को 9 से बढ़ाकर 12 तक ले जाती है तो इसका असर राज्यसभा में सरकार की बहुमत और चर्चा की ताकत पर पड़ सकता है।

कांग्रेस को भी इस चुनाव में 4-5 सीटों का फायदा मिलने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि राजनीतिक जानकारों का कहना है कि सीटों का गणित केवल एक पहलू है। असली कहानी राज्यसभा में सदन का संतुलन बनाए रखने और रणनीतिक गठबंधन पर निर्भर करेगी।

विशेषज्ञों का कहना है कि कई राज्य और क्षेत्रीय पार्टियों के साथ गठबंधन और समझौते इस चुनाव की दिशा तय करेंगे। सीटों की संख्या के अलावा यह भी महत्वपूर्ण होगा कि कौन-कौन से सदस्य किस पक्ष में मतदान करेंगे और सरकार को किस हद तक सहयोग मिलेगा।

राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि इस चुनाव के नतीजे केंद्र और राज्य स्तर पर दोनों के लिए संकेतक साबित होंगे। एनडीए और विपक्ष दोनों ही अपनी रणनीति को अंतिम रूप देने में लगे हुए हैं।

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