Eid al-Adha 2026 से पहले बाजारों में रौनक बढ़ने लगी है, लेकिन इस बार बकरों की कीमतों ने खरीदारों की चिंता भी बढ़ा दी है। बकरीद के लिए बकरे खरीदने पहुंच रहे लोग बढ़ी हुई कीमतों को देखकर हैरान हैं। व्यापारियों और ग्राहकों का कहना है कि इस बार दामों में पिछले वर्षों की तुलना में असामान्य बढ़ोतरी देखने को मिल रही है।
राजाबाजार के व्यापारी Nuruddin Ansari ने बताया कि हर साल बकरीद के मौके पर बकरों की कीमतों में सामान्य तौर पर 15 से 20 प्रतिशत तक वृद्धि होती थी, लेकिन इस बार दामों में करीब ढाई सौ से तीन सौ प्रतिशत तक का इजाफा हो गया है।
व्यापारियों के मुताबिक पशुओं के चारे की बढ़ती कीमत, परिवहन खर्च, रखरखाव और बाजार में मांग बढ़ने के कारण बकरों के दाम तेजी से बढ़े हैं। कई बकरे, जो पहले मध्यम वर्ग की पहुंच में होते थे, अब काफी महंगे हो गए हैं।
खरीदारों का कहना है कि पिछले साल जिन बकरों की कीमत 20 से 30 हजार रुपये के बीच थी, इस बार उन्हीं की कीमत कई जगह 60 हजार रुपये या उससे अधिक तक पहुंच गई है। इससे आम लोगों का बजट प्रभावित हो रहा है।
बाजारों में इस समय अलग-अलग नस्लों के बकरे बिक्री के लिए लाए जा रहे हैं। बड़े और आकर्षक बकरों की मांग सबसे ज्यादा है, लेकिन उनकी कीमतें भी रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच चुकी हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि त्योहारों के दौरान मांग बढ़ने से पशु बाजारों में कीमतों में तेजी आना सामान्य बात है, लेकिन इस बार महंगाई और आपूर्ति संबंधी कारणों ने स्थिति को और प्रभावित किया है।
कई खरीदार अब छोटे और कम कीमत वाले बकरों की तलाश कर रहे हैं ताकि त्योहार की परंपरा निभाने के साथ बजट भी संतुलित रखा जा सके। वहीं व्यापारी उम्मीद जता रहे हैं कि त्योहार नजदीक आने के साथ बाजार में खरीदारी और बढ़ेगी।
पशु बाजारों में भीड़ बढ़ने के साथ प्रशासन और स्थानीय निकायों की ओर से व्यवस्थाओं पर नजर रखी जा रही है। सुरक्षा, साफ-सफाई और यातायात को लेकर भी विशेष इंतजाम किए जा रहे हैं।
फिलहाल बकरीद 2026 से पहले बकरों की बढ़ी कीमतें चर्चा का विषय बनी हुई हैं। बाजारों में रौनक तो है, लेकिन महंगाई ने खरीदारों की जेब पर बड़ा असर डाला है।

