बिहार चुनाव में हार के बाद तेजस्वी यादव के विदेश दौरे पर सियासी सवाल, NDA नेताओं ने जांच की मांग की
बिहार विधानसभा चुनाव में हार के बाद नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव का विदेश दौरा अब राज्य की राजनीति में नई बहस का केंद्र बन गया है। चुनाव परिणाम आने के बाद तेजस्वी यादव विदेश गए थे और इस दौरान विधानसभा सत्र में उनकी गैरमौजूदगी ने सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच राजनीतिक तूफान खड़ा कर दिया। अब नेता प्रतिपक्ष बिहार लौट चुके हैं, लेकिन एनडीए (NDA) नेताओं ने उनके विदेश दौरे की उच्च स्तरीय जांच की मांग तेज कर दी है।
सूत्रों के अनुसार, एनडीए नेताओं का कहना है कि विधानसभा सत्र के दौरान नेता प्रतिपक्ष की अनुपस्थिति गंभीर और अस्वाभाविक थी। उनका आरोप है कि तेजस्वी यादव ने अपने राजनीतिक और संवैधानिक दायित्वों की अनदेखी की, जबकि राज्य के महत्वपूर्ण मामलों पर चर्चा हो रही थी। एनडीए नेताओं का मानना है कि इस विदेश दौरे की वास्तविक जरूरत और खर्च का पूरा ब्यौरा जनता और विधानसभा के सामने रखा जाना चाहिए।
सत्तापक्ष के एक वरिष्ठ नेता ने बताया, “नेता प्रतिपक्ष की विदेश यात्रा के दौरान विधानसभा में उनकी गैरमौजूदगी ने सवाल खड़े कर दिए हैं। उच्च स्तरीय जांच से यह पता चलेगा कि यह दौरा किस उद्देश्य से किया गया और इसमें संसाधनों का सही इस्तेमाल हुआ या नहीं।”
वहीं, नेता प्रतिपक्ष के कार्यालय से बताया गया है कि तेजस्वी यादव का यह दौरा राजनीतिक और व्यक्तिगत कारणों से था और इस दौरान उन्होंने कई अंतरराष्ट्रीय नेताओं और संगठनों से मुलाकात की। कार्यालय का कहना है कि यात्रा का उद्देश्य राज्य और पार्टी की छवि को अंतरराष्ट्रीय मंच पर पेश करना भी था।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि बिहार में चुनाव हारने के तुरंत बाद विदेश दौरा करना स्वाभाविक रूप से चर्चा का विषय बन सकता है। ऐसे समय में जब विधानसभा सत्र चल रहा था और नेता प्रतिपक्ष की भूमिका महत्वपूर्ण होती है, उनकी गैरमौजूदगी राजनीतिक और संवैधानिक जिम्मेदारी के लिहाज से संवेदनशील मानी जा सकती है।
एनडीए नेताओं ने मुख्यमंत्री कार्यालय और संबंधित विभागों से इस यात्रा की पूरी रिपोर्ट और खर्च का ब्यौरा सार्वजनिक करने की मांग भी की है। उनका कहना है कि इस मामले की जांच से राजनीतिक पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित होगी।
इस मामले ने बिहार की सियासत में नए राजनीतिक मोड़ को जन्म दे दिया है। विपक्ष में रहते हुए नेता प्रतिपक्ष के विदेश दौरे और विधानसभा सत्र में अनुपस्थिति को लेकर विभिन्न दलों में तीखी बहस चल रही है। राज्य के राजनीतिक पर्यवेक्षकों का कहना है कि यह मामला आगामी महीनों में विधानसभा और राजनीतिक मंचों पर बार-बार उछल सकता है।
तेजस्वी यादव के लौटने के बाद अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या एनडीए नेताओं की मांग के अनुसार उच्च स्तरीय जांच होगी और इसके परिणाम किस प्रकार की राजनीतिक हलचल पैदा करेंगे।
बिहार की राजनीति में यह मामला यह भी उजागर करता है कि चुनाव हारने के बाद नेता प्रतिपक्ष और सत्ताधारी दल के बीच राजनीतिक तनाव और जांच-प्रतिक्षा के मुद्दे हमेशा गर्म रहते हैं।

