बिहार में करारी हार के बाद राजद में ‘सर्विसिंग’ की तैयारी, तेजस्वी–सुधाकर की जोड़ी को मिल सकती है बड़ी जिम्मेदारी
बिहार की सियासत में हालिया चुनावी नतीजों के बाद राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के भीतर आत्ममंथन और संगठनात्मक बदलाव की प्रक्रिया तेज हो गई है। करारी हार से सबक लेते हुए पार्टी अब अपनी अंदरूनी ‘सर्विसिंग’ की तैयारी में जुट गई है। सूत्रों की मानें तो राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव पार्टी को नए सिरे से खड़ा करने की रणनीति पर काम कर रहे हैं, जिसमें पुराने और आज़माए हुए राजनीतिक फार्मूले को नई पीढ़ी के नेतृत्व के साथ जोड़ने की कोशिश की जा रही है।
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि लालू यादव अपनी उस राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाने की दिशा में कदम उठा सकते हैं, जिसे कभी जगदानंद सिंह के साथ उनकी बेहतरीन ट्यूनिंग ने मजबूती दी थी। अब यही जिम्मेदारी तेजस्वी यादव और सुधाकर सिंह की जोड़ी को सौंपी जा सकती है। माना जा रहा है कि संगठन और सरकार दोनों स्तरों पर इन दोनों नेताओं को समन्वय की बड़ी भूमिका मिल सकती है।
तेजस्वी यादव पहले ही राजद के सबसे बड़े चेहरे और मुख्यमंत्री पद के दावेदार के रूप में स्थापित हो चुके हैं। युवाओं, पिछड़े वर्ग और अल्पसंख्यकों के बीच उनकी पकड़ को पार्टी की सबसे बड़ी ताकत माना जाता है। वहीं सुधाकर सिंह, जो अपनी बेबाक बयानबाज़ी और ज़मीनी राजनीति के लिए जाने जाते हैं, हाल के दिनों में लगातार सुर्खियों में रहे हैं। हालांकि उनके कुछ बयानों ने पार्टी को असहज भी किया, लेकिन यह भी सच है कि वे ग्रामीण और किसान राजनीति में मजबूत दखल रखते हैं।
पार्टी सूत्रों का कहना है कि लालू यादव अब संगठन में स्पष्ट संदेश देना चाहते हैं कि राजद केवल परिवार या कुछ चेहरों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि ज़मीनी नेताओं को भी आगे लाया जाएगा। इसी रणनीति के तहत तेजस्वी और सुधाकर की जोड़ी को एक-दूसरे के पूरक के रूप में देखा जा रहा है—जहां तेजस्वी आधुनिक, विकास और युवा राजनीति का चेहरा हैं, वहीं सुधाकर पारंपरिक, ग्रामीण और किसान हितों की राजनीति का प्रतिनिधित्व करते हैं।
राजद के भीतर यह भी माना जा रहा है कि पार्टी को विपक्ष की भूमिका में रहते हुए अधिक आक्रामक और संगठित रणनीति अपनानी होगी। इसके लिए अनुशासन, स्पष्ट लाइन और सामूहिक नेतृत्व पर ज़ोर दिया जा सकता है। आने वाले दिनों में संगठनात्मक फेरबदल, जिलाध्यक्षों से लेकर प्रदेश स्तर तक बदलाव की संभावना जताई जा रही है।
हालांकि, इस संभावित नई ट्यूनिंग को लेकर पार्टी के अंदर अलग-अलग राय भी सामने आ रही है। कुछ वरिष्ठ नेता चाहते हैं कि कोई भी बदलाव बेहद संतुलित तरीके से हो, ताकि आंतरिक कलह न बढ़े। वहीं समर्थकों का मानना है कि अगर राजद को दोबारा सत्ता की लड़ाई में मजबूत दावेदार बनना है, तो नए प्रयोग और साहसिक फैसले ज़रूरी हैं।

