60 साल बाद ग्रहों के विशेष संयोग में श्राद्ध पक्ष, 16 दिन तक पितरों के लिए होंगे तर्पण और पूजन; सर्वपितृ अमावस्या पर भी खास योग
इस बार श्राद्ध पक्ष कई विशेष संयोगों के कारण खास माना जा रहा है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, करीब 60 वर्ष बाद ग्रहों की विशेष स्थिति के बीच पितृ पक्ष का आयोजन हो रहा है। इस दौरान 16 दिनों तक पितरों के निमित्त तर्पण, श्राद्ध और पूजन किए जाएंगे।
श्राद्ध पक्ष में पितरों को याद करने और उनके लिए धार्मिक अनुष्ठान करने की परंपरा है। मान्यता के अनुसार, इन दिनों में श्रद्धापूर्वक किए गए तर्पण और दान से पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है। इस बार पितृ पक्ष में कई महत्वपूर्ण तिथियों का संयोग बन रहा है, जिससे इसका धार्मिक महत्व और बढ़ गया है।
इस अवधि में सर्वपितृ अमावस्या का विशेष महत्व रहेगा। इस दिन उन सभी पितरों के लिए श्राद्ध किया जाता है, जिनकी मृत्यु तिथि ज्ञात नहीं होती या जिनका श्राद्ध किसी कारणवश नहीं हो पाया हो। इसके अलावा इस बार शनिचरी अमावस्या का संयोग भी बन रहा है, जिससे अमावस्या का महत्व और बढ़ गया है।
ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार, पितृ पक्ष के दौरान ग्रहों की स्थिति और विशेष योग धार्मिक कार्यों के लिए महत्वपूर्ण माने जाते हैं। इस दौरान लोग अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए पूजा-पाठ, पिंडदान, तर्पण और दान करते हैं।
इस बार श्राद्ध पक्ष में गजछाया योग का भी संयोग बताया जा रहा है। धार्मिक मान्यताओं में इस योग को पितरों के निमित्त किए जाने वाले कार्यों के लिए शुभ माना जाता है। श्रद्धालु इस अवसर पर पितरों के लिए विशेष पूजा और अनुष्ठान करेंगे।
धार्मिक विशेषज्ञों के अनुसार, श्राद्ध पक्ष में सात्विक जीवन अपनाने, जरूरतमंदों को भोजन कराने और दान-पुण्य करने की परंपरा रही है। लोग अपने घरों में विधि-विधान से पितरों का स्मरण करते हैं और उनकी कृपा की कामना करते हैं।
इस बार के श्राद्ध पक्ष में बनने वाले विशेष संयोगों को लेकर श्रद्धालुओं में उत्साह है। देशभर में लोग पितरों के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने के लिए अलग-अलग धार्मिक स्थलों और घरों में पूजा-अर्चना की तैयारियां कर रहे हैं।

