भागलपुर में हत्या के मामलों में गवाह और अधिकारियों की गैरहाजिरी से न्याय प्रक्रिया में अड़चन
भागलपुर जिले में हत्या के तीन दर्जन से अधिक मामले लंबे समय से पुलिस अधिकारियों और डॉक्टरों की गवाही के अभाव में अटके हुए हैं। जिले में न्याय व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने के लिए पटना उच्च न्यायालय लगातार प्रयास कर रहा है, लेकिन जांचकर्ताओं और गवाहों की गैरहाजिरी के कारण मामलों का निपटारा धीमा पड़ गया है।
पुलिस सूत्रों के अनुसार, कई मामलों में आरोपी के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी होने के बावजूद गवाहों की अनुपस्थिति न्याय प्रक्रिया में बाधा बन रही है। अधिकारीयों का कहना है कि गवाहों की गैरमौजूदगी और चिकित्सकों की गवाही न मिलने के कारण आरोपियों के खिलाफ ठोस सबूत पेश करना मुश्किल हो रहा है। इससे न केवल न्याय में देरी हो रही है, बल्कि आरोपियों को असामयिक लाभ मिलने की संभावना भी बनी रहती है।
भागलपुर के वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया, “हमें न्यायालय द्वारा मामले तेजी से निपटाने का दबाव है, लेकिन जब गवाह और आवश्यक अधिकारी उपस्थित नहीं होते, तो कार्रवाई बाधित हो जाती है। कई मामलों में गवाह डर या अन्य व्यक्तिगत कारणों से कोर्ट में हाजिर नहीं हो पाते। इससे पीड़ित परिवारों को भी न्याय मिलने में लंबा समय लग रहा है।”
वहीं, कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि गवाहों और अधिकारियों की अनुपस्थिति से लंबित मामलों में न्यायिक देरी का सामना करना पड़ता है, जो न्यायिक प्रक्रिया की विश्वसनीयता को प्रभावित करता है। उनका कहना है कि इस स्थिति से न केवल पीड़ितों के अधिकार प्रभावित हो रहे हैं, बल्कि आरोपी के खिलाफ ठोस कार्रवाई करने में भी कठिनाई आ रही है।
पटना उच्च न्यायालय ने इस स्थिति को गंभीरता से लेते हुए संबंधित जिलाधिकारी और पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे गवाहों की सुरक्षा सुनिश्चित करें और आवश्यक गवाह और विशेषज्ञों को कोर्ट में उपस्थित कराने के लिए विशेष कदम उठाएं। न्यायालय का मानना है कि समय पर गवाहों और अधिकारियों की उपस्थिति सुनिश्चित करने से ही लंबित मामलों का त्वरित निपटारा संभव है।
भागलपुर जिले में हत्या के मामलों की लंबित सूची में कई वर्ष पुराने मामले भी शामिल हैं। स्थानीय निवासी और पीड़ित परिवारों का कहना है कि न्याय प्रक्रिया में इस देरी के कारण उन्हें मानसिक और सामाजिक दबाव का सामना करना पड़ रहा है। कई लोग आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई में तेज़ी लाने की मांग कर रहे हैं।
विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि गवाहों की सुरक्षा, पुलिस और स्वास्थ्य अधिकारियों की सक्रिय भागीदारी, और न्यायालय द्वारा निर्देशित समयबद्ध कार्रवाई के बिना ऐसे मामलों का समाधान मुश्किल है। इस दिशा में प्रशासन द्वारा ठोस कदम उठाना आवश्यक है, ताकि न्याय प्रक्रिया की विश्वसनीयता बनी रहे और पीड़ितों को उचित न्याय मिल सके।
भागलपुर में लंबित हत्या मामलों की स्थिति यह स्पष्ट करती है कि गवाह और अधिकारियों की उपस्थिति न्याय की सफलता के लिए अहम भूमिका निभाती है। इसे सुधारने के लिए न्यायपालिका, पुलिस और प्रशासन को मिलकर रणनीतिक कदम उठाने होंगे, ताकि न्याय प्रक्रिया में देरी न हो और कानून के शासन को मज़बूती मिले।

