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बिहार की राजनीति में नया सियासी समीकरण! कांग्रेस के छह विधायक जदयू में शामिल होंगे या आएगा बड़ा ट्विस्ट?

बिहार की राजनीति में नया सियासी समीकरण! कांग्रेस के छह विधायक जदयू में शामिल होंगे या आएगा बड़ा ट्विस्ट?

बिहार की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है और इस बार चर्चा के केंद्र में जनता दल यूनाइटेड (जदयू) है। राजनीतिक गलियारों में जोर-शोर से यह चर्चा चल रही है कि कांग्रेस के सभी छह विधायक जल्द ही जदयू की सदस्यता ग्रहण कर सकते हैं। अगर ऐसा होता है तो यह राज्य की सियासत में एक बड़ा उलटफेर माना जाएगा। हालांकि इस संभावित दल-बदल की कहानी नई नहीं है, बल्कि इसके संकेत चुनाव परिणाम आने के तुरंत बाद ही मिलने लगे थे।

चुनाव नतीजों के बाद ही कांग्रेस विधायकों को जदयू में शामिल कराने की कवायद शुरू हो गई थी। उस समय यह माना जा रहा था कि कांग्रेस के भीतर असंतोष गहराता जा रहा है और विधायकों का झुकाव सत्ताधारी दल की ओर बढ़ रहा है। लेकिन तब यह पूरी कवायद महज चर्चाओं तक ही सीमित रह गई थी। वजह यह थी कि कांग्रेस के कुछ विधायक उस समय पार्टी के प्रति पूरी तरह समर्पित नजर आ रहे थे और खुलकर किसी तरह की बगावत सामने नहीं आई थी।

अब एक बार फिर कांग्रेस विधायकों के टूटने की खबरें सामने आ रही हैं। सूत्रों की मानें तो इस बार मामला सिर्फ कयासों तक सीमित नहीं है, बल्कि धरातल पर मजबूत राजनीतिक बैटिंग कर ली गई है। बताया जा रहा है कि संभावित दल-बदल को लेकर रणनीति काफी हद तक तैयार है और कांग्रेस विधायक भी इस पूरे घटनाक्रम से संतुष्ट बताए जा रहे हैं। सत्ता में भागीदारी, राजनीतिक भविष्य और क्षेत्रीय विकास जैसे मुद्दों को लेकर उन्हें आश्वासन दिए गए हैं।

हालांकि इसी बीच इस पूरे दल-बदल कार्यक्रम में एक गजब का ट्विस्ट आ गया है। यह ट्विस्ट क्या है, इसे लेकर अभी तक आधिकारिक तौर पर कुछ भी स्पष्ट नहीं किया गया है, लेकिन राजनीतिक जानकारों का कहना है कि यह अड़चन कानूनी, संगठनात्मक या शीर्ष नेतृत्व से जुड़ी हो सकती है। दल-बदल कानून, पार्टी की आंतरिक सहमति या गठबंधन की मजबूरियां इस प्रक्रिया को जटिल बना रही हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कांग्रेस विधायकों का एकसाथ जदयू में शामिल होना आसान नहीं होगा। इसके लिए न केवल विधायकों की सहमति जरूरी है, बल्कि कानूनी प्रावधानों और राजनीतिक संतुलन को भी साधना होगा। यदि प्रक्रिया में थोड़ी भी चूक होती है, तो मामला उलटा भी पड़ सकता है।

वहीं कांग्रेस खेमे में भी इस संभावित टूट को लेकर बेचैनी देखी जा रही है। पार्टी नेतृत्व विधायकों को एकजुट रखने की कोशिश में जुटा है और अंदरखाने संवाद तेज कर दिया गया है। दूसरी ओर, जदयू खेमे में फिलहाल सतर्कता बरती जा रही है और किसी भी तरह की जल्दबाजी से बचा जा रहा है।

कुल मिलाकर, बिहार की राजनीति एक बार फिर निर्णायक मोड़ पर खड़ी नजर आ रही है। कांग्रेस के छह विधायकों का भविष्य, जदयू की रणनीति और इस पूरे घटनाक्रम में आया “ट्विस्ट” आने वाले दिनों में राज्य की सियासी दिशा तय कर सकता है। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि यह चर्चा हकीकत में बदलती है या फिर एक बार फिर राजनीतिक अफवाह बनकर रह जाती है।

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