बिहार में 52% बालू घाटों की नीलामी अटकी, सरकार को करोड़ों का नुकसान; बढ़ सकते हैं बालू के दाम
बिहार में बालू खनन और आपूर्ति व्यवस्था को लेकर सरकार के सामने बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है। राज्य में अब तक करीब 52 फीसदी बालू घाटों की नीलामी नहीं हो सकी है। बालू घाटों की नीलामी प्रक्रिया पूरी नहीं होने के कारण सरकार को राजस्व का भारी नुकसान होने की आशंका है। वहीं, पर्याप्त वैध खनन नहीं होने से आने वाले दिनों में कई जिलों में बालू की कीमतों में भी बढ़ोतरी हो सकती है।
राज्य में निर्माण कार्यों के लिए बालू की मांग लगातार बनी रहती है। मकान, सड़क, पुल और अन्य निर्माण परियोजनाओं में बड़े पैमाने पर बालू की जरूरत होती है। ऐसे में बालू घाटों की नीलामी नहीं होने और वैध खनन की मात्रा कम रहने से बाजार में आपूर्ति प्रभावित हो सकती है।
आधे से ज्यादा घाटों की नीलामी बाकी
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, बिहार में अब तक करीब 52 प्रतिशत बालू घाटों की नीलामी नहीं हो पाई है। इसके चलते बड़ी संख्या में घाटों से नियमित और वैध तरीके से बालू खनन शुरू नहीं हो सका है। नीलामी प्रक्रिया में देरी का असर सरकारी राजस्व पर भी पड़ रहा है।
बालू घाटों की नीलामी से सरकार को खनन शुल्क और अन्य माध्यमों से राजस्व प्राप्त होता है। जब घाटों की नीलामी नहीं होती तो सरकार को संभावित राजस्व से हाथ धोना पड़ता है। यही वजह है कि लंबे समय से नीलामी प्रक्रिया लंबित रहने को आर्थिक नुकसान के तौर पर देखा जा रहा है।
बढ़ सकती हैं बालू की कीमतें
वैध खनन पर्याप्त मात्रा में नहीं होने की स्थिति में बाजार में बालू की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है। मांग और आपूर्ति के बीच अंतर बढ़ने पर बालू की कीमतों में इजाफा होने की संभावना है। इसका सीधा असर निर्माण कार्य करा रहे लोगों और निर्माण क्षेत्र से जुड़े कारोबारियों पर पड़ेगा।
यदि बालू महंगी होती है तो मकान निर्माण की लागत भी बढ़ सकती है। छोटे स्तर पर घर बनाने वाले लोगों के साथ-साथ बड़े निर्माण प्रोजेक्ट पर भी इसका प्रभाव पड़ने की संभावना है।
अवैध खनन पर भी चुनौती
बालू की मांग अधिक और वैध आपूर्ति कम होने पर अवैध खनन की गतिविधियों को बढ़ावा मिलने का खतरा रहता है। इससे सरकार के राजस्व को नुकसान होने के साथ-साथ पर्यावरण और नदियों के प्राकृतिक स्वरूप पर भी प्रतिकूल असर पड़ सकता है।
प्रशासन के लिए चुनौती यह होगी कि नीलामी प्रक्रिया में तेजी लाने के साथ अवैध खनन पर भी प्रभावी नियंत्रण रखा जाए। पर्याप्त वैध बालू उपलब्ध होने से बाजार में कीमतों को नियंत्रित रखने में मदद मिल सकती है।
फिलहाल 52 फीसदी बालू घाटों की नीलामी नहीं होने से सरकार के राजस्व और निर्माण क्षेत्र दोनों पर असर पड़ने की आशंका है। यदि नीलामी प्रक्रिया जल्द पूरी नहीं होती और वैध खनन में तेजी नहीं आती, तो आने वाले दिनों में कई जिलों में बालू की कीमत बढ़ सकती है। इससे आम लोगों के लिए घर बनाना और निर्माण कार्य कराना पहले की तुलना में महंगा हो सकता है।

