औरंगाबाद में 34% कम बारिश से बढ़ी किसानों की चिंता, धान की खेती पर मंडराया संकट
बिहार के औरंगाबाद जिले में इस वर्ष मानसून की सुस्त रफ्तार ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। सामान्य से काफी कम बारिश होने के कारण खरीफ फसलों की बुवाई और खेती प्रभावित हो रही है। सबसे अधिक असर धान की खेती पर देखने को मिल रहा है, क्योंकि यह फसल पर्याप्त वर्षा पर निर्भर करती है।
जिला कृषि पदाधिकारी कार्यालय की ओर से जारी वर्षा आंकड़ों के अनुसार, 29 जुलाई 2026 तक जिले में सामान्य वर्षा की तुलना में करीब 34 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है। बारिश की इस कमी ने किसानों की चिंताओं को और बढ़ा दिया है।
धान की रोपाई पर पड़ा सबसे ज्यादा असर
बारिश कम होने से खेतों में पर्याप्त पानी नहीं भर पाया है, जिसके कारण धान की रोपाई प्रभावित हुई है। कई किसानों को सिंचाई के वैकल्पिक साधनों का सहारा लेना पड़ रहा है, जिससे खेती की लागत भी बढ़ रही है।
कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि यदि आने वाले दिनों में अच्छी बारिश नहीं हुई तो धान की पैदावार पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है।
खरीफ फसलों के लिए चुनौतीपूर्ण स्थिति
केवल धान ही नहीं, बल्कि अन्य खरीफ फसलें भी कम वर्षा से प्रभावित हो रही हैं। खेतों में नमी की कमी के कारण फसलों की शुरुआती बढ़वार प्रभावित हो रही है। जिन क्षेत्रों में सिंचाई की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है, वहां किसानों की परेशानी और अधिक बढ़ गई है।
किसानों की बढ़ी चिंता
किसानों का कहना है कि समय पर पर्याप्त बारिश नहीं होने से खेती का पूरा चक्र प्रभावित हो रहा है। यदि जल्द ही मानसून सक्रिय नहीं हुआ तो उत्पादन घटने के साथ आर्थिक नुकसान की आशंका भी बढ़ जाएगी।
मौसम पर टिकी उम्मीदें
कृषि विभाग किसानों को उपलब्ध संसाधनों के अनुसार सिंचाई और फसल प्रबंधन की सलाह दे रहा है। वहीं किसान अब मानसून के सक्रिय होने का इंतजार कर रहे हैं, ताकि खेतों में पर्याप्त पानी पहुंच सके और खरीफ फसलों को नुकसान से बचाया जा सके।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगस्त में अच्छी बारिश होने पर स्थिति में कुछ सुधार संभव है, लेकिन यदि वर्षा का अभाव जारी रहा तो जिले की कृषि उत्पादन पर इसका व्यापक असर पड़ सकता है।

