26 साल पुराना जल विवाद सुलझा, अमित शाह की पहल पर बिहार-झारखंड में सोन नदी के पानी का समझौता
बिहार और झारखंड के बीच पिछले 26 साल से उलझे सोन नदी के जल बंटवारे का विवाद आखिरकार सुलझ गया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की पहल के बाद दोनों राज्यों के बीच इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर सहमति बनी। दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम में बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने जल बंटवारे को लेकर सहमति पत्र पर हस्ताक्षर किए।
लंबे समय से चला आ रहा था विवाद
बिहार और झारखंड के बीच सोन नदी के पानी के बंटवारे को लेकर लंबे समय से विवाद चला आ रहा था। झारखंड के अलग राज्य बनने के बाद दोनों राज्यों के बीच जल संसाधनों के इस्तेमाल और हिस्सेदारी को लेकर मतभेद बने हुए थे।
करीब ढाई दशक से लंबित इस मामले के समाधान के लिए अलग-अलग स्तरों पर बातचीत होती रही, लेकिन दोनों राज्यों के बीच सहमति नहीं बन पाई थी। अब केंद्र की पहल के बाद इस विवाद को सुलझाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है।
दिल्ली में हुआ समझौता
सोन नदी के जल बंटवारे को लेकर दोनों राज्यों के बीच सहमति पत्र पर दिल्ली में हस्ताक्षर किए गए। इस दौरान बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन मौजूद रहे।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में हुए इस समझौते को दोनों राज्यों के लिए अहम माना जा रहा है। समझौते के बाद सोन नदी के जल का इस्तेमाल और बंटवारा तय व्यवस्था के अनुसार किया जा सकेगा।
किसानों और सिंचाई के लिए अहम
सोन नदी का पानी बिहार और झारखंड के कई इलाकों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। नदी और उससे जुड़ी सिंचाई परियोजनाओं पर बड़ी संख्या में किसान निर्भर हैं। लंबे समय से चले आ रहे विवाद का असर जल प्रबंधन और सिंचाई व्यवस्था पर भी पड़ता रहा है।
अब समझौता होने के बाद दोनों राज्यों के बीच जल संसाधनों के बेहतर प्रबंधन का रास्ता साफ होने की उम्मीद है। इससे सिंचाई व्यवस्था को लाभ मिल सकता है और पानी को लेकर राज्यों के बीच टकराव की स्थिति भी कम होगी।
केंद्र की मध्यस्थता से निकला समाधान
सोन नदी जल विवाद को सुलझाने के लिए केंद्र सरकार की ओर से दोनों राज्यों के बीच संवाद कराया गया। कई दौर की बातचीत के बाद आखिरकार सहमति बनी और दोनों मुख्यमंत्रियों ने समझौते पर हस्ताक्षर किए।
26 साल पुराने इस विवाद का समाधान बिहार और झारखंड के बीच अंतरराज्यीय सहयोग की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अब दोनों राज्यों के सामने समझौते को प्रभावी तरीके से लागू करने की चुनौती होगी।
सोन नदी के जल बंटवारे पर बनी यह सहमति लंबे समय से चले आ रहे विवाद के अंत की शुरुआत मानी जा रही है। इससे दोनों राज्यों के बीच जल संसाधनों को लेकर सहयोग बढ़ने और किसानों को बेहतर सिंचाई सुविधा मिलने की उम्मीद है।

