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जमुई में चमकी बुखार से 12 वर्षीय बच्चे की मौत, इलाज में लापरवाही का आरोप; ग्रामीणों का हंगामा

बिहार के जमुई जिले के गिद्धौर इलाके में चमकी बुखार (एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम) से पीड़ित एक 12 वर्षीय बालक की इलाज के दौरान मौत हो गई। घटना के बाद इलाके में आक्रोश फैल गया और परिजनों व ग्रामीणों ने स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए।  जानकारी के अनुसार, बच्चे की तबीयत बिगड़ने पर उसे स्थानीय स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, लेकिन वहां स्वास्थ्य केंद्र बंद मिलने और डॉक्टरों की अनुपस्थिति के कारण समय पर इलाज नहीं मिल सका। परिजनों का आरोप है कि इसी देरी और लापरवाही के कारण बच्चे की हालत बिगड़ती गई और उसकी मौत हो गई।  घटना से आक्रोशित परिजनों और ग्रामीणों ने स्वास्थ्य केंद्र परिसर के बाहर हंगामा किया और लापरवाह कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। लोगों का कहना है कि अगर समय पर इलाज उपलब्ध हो जाता तो बच्चे की जान बचाई जा सकती थी।  सूचना मिलने पर प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे और स्थिति को शांत कराने का प्रयास किया। अधिकारियों ने मामले की जांच के आदेश दिए हैं और संबंधित स्वास्थ्य कर्मियों की भूमिका की जांच की जा रही है।  इस घटना ने एक बार फिर ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति और आपातकालीन चिकित्सा व्यवस्था की तैयारियों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों ने स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार और जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।

बिहार के जमुई जिले के गिद्धौर इलाके में चमकी बुखार (एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम) से पीड़ित एक 12 वर्षीय बालक की इलाज के दौरान मौत हो गई। घटना के बाद इलाके में आक्रोश फैल गया और परिजनों व ग्रामीणों ने स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए।

जानकारी के अनुसार, बच्चे की तबीयत बिगड़ने पर उसे स्थानीय स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, लेकिन वहां स्वास्थ्य केंद्र बंद मिलने और डॉक्टरों की अनुपस्थिति के कारण समय पर इलाज नहीं मिल सका। परिजनों का आरोप है कि इसी देरी और लापरवाही के कारण बच्चे की हालत बिगड़ती गई और उसकी मौत हो गई।

घटना से आक्रोशित परिजनों और ग्रामीणों ने स्वास्थ्य केंद्र परिसर के बाहर हंगामा किया और लापरवाह कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। लोगों का कहना है कि अगर समय पर इलाज उपलब्ध हो जाता तो बच्चे की जान बचाई जा सकती थी।

सूचना मिलने पर प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे और स्थिति को शांत कराने का प्रयास किया। अधिकारियों ने मामले की जांच के आदेश दिए हैं और संबंधित स्वास्थ्य कर्मियों की भूमिका की जांच की जा रही है।

इस घटना ने एक बार फिर ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति और आपातकालीन चिकित्सा व्यवस्था की तैयारियों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों ने स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार और जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।

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