क्यों 'सेक्युलर' हिमंता बिस्वा सरमा ने छोड़ी कांग्रेस, राहुल गांधी के डॉगी 'पिद्दी' के बिस्कुट वाला किस्सा
Himanta Biswa Sarma की राजनीतिक यात्रा असम की समकालीन राजनीति में सबसे चर्चित बदलावों में से एक मानी जाती है। वे लंबे समय तक कांग्रेस में रहे और बाद में बीजेपी में शामिल होकर राज्य की राजनीति में बड़ा प्रभाव छोड़ते रहे।
कांग्रेस में लंबा सफर
हिमंता बिस्वा सरमा ने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत Indian National Congress से की थी। वे करीब 24–25 साल तक कांग्रेस से जुड़े रहे और असम की राजनीति में एक मजबूत नेता के रूप में उभरे। वे असम सरकार में मंत्री भी रहे और संगठनात्मक स्तर पर भी सक्रिय भूमिका निभाते रहे।
विवाद और मतभेद की शुरुआत
समय के साथ कांग्रेस नेतृत्व और राज्य इकाई के बीच मतभेद बढ़ने लगे। हिमंता सरमा और तत्कालीन केंद्रीय नेतृत्व, खासकर राहुल गांधी के साथ उनके रिश्तों को लेकर भी कई राजनीतिक चर्चाएं सामने आती रहीं। पार्टी में निर्णय प्रक्रिया, नेतृत्व शैली और राज्य की राजनीति को लेकर असहमति की खबरें लगातार चर्चा में रही थीं।
इसी दौर में एक घटना को लेकर भी सोशल मीडिया और राजनीतिक बहसों में चर्चा होती रही, जिसमें Rahul Gandhi और उनके पालतू कुत्ते से जुड़ा एक किस्सा बताया जाता है। हालांकि यह दावा अक्सर राजनीतिक व्यंग्य और अपुष्ट चर्चाओं के रूप में सामने आता है और इसकी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं है।
बीजेपी में शामिल होना
वर्ष 2015 के आसपास हिमंता बिस्वा सरमा ने कांग्रेस छोड़कर Bharatiya Janata Party (बीजेपी) का दामन थाम लिया। उनके इस फैसले को उस समय असम की राजनीति में बड़ा मोड़ माना गया। बीजेपी में शामिल होने के बाद वे पार्टी के पूर्वोत्तर विस्तार में एक अहम रणनीतिक चेहरा बन गए।
बीजेपी में भूमिका और उभार
बीजेपी में आने के बाद उन्होंने संगठन और चुनावी रणनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनकी नेतृत्व क्षमता को देखते हुए उन्हें बाद में असम का मुख्यमंत्री बनाया गया। उनके नेतृत्व में पार्टी ने राज्य में लगातार मजबूत स्थिति बनाई और चुनावी सफलता हासिल की।
राजनीतिक विश्लेषण
विशेषज्ञ मानते हैं कि उनके कांग्रेस छोड़ने के पीछे संगठनात्मक असहमति, नेतृत्व से मतभेद और राजनीतिक भविष्य को लेकर रणनीतिक निर्णय जैसे कई कारण रहे होंगे। हालांकि इस पूरे घटनाक्रम को लेकर अलग-अलग राजनीतिक व्याख्याएं भी मौजूद हैं।

