मई में मानसून जैसा कहर: गर्मी गायब, आंधी-ओले और बारिश ने मचाया तांडव, यूपी में 90 लोगों की मौत की खबर
आधी मई बीत जाने के बावजूद इस साल मौसम ने सभी पुराने रिकॉर्ड और अनुमान उलट दिए हैं। जहां आमतौर पर इस समय तक सूरज की तपिश और लू का प्रकोप चरम पर होता है, वहीं इस बार हालात बिल्कुल अलग दिखाई दे रहे हैं। देश के कई हिस्सों में गर्मी का नामोनिशान नहीं है और आसमान से कभी बारिश, कभी तेज़ आंधी और कई जगहों पर ओलावृष्टि देखने को मिल रही है।
मौसम का यह अप्रत्याशित व्यवहार न सिर्फ आम लोगों के लिए हैरानी का कारण बना हुआ है, बल्कि किसानों और प्रशासन के लिए भी बड़ी चुनौती बन गया है। उत्तर प्रदेश से आई रिपोर्टों के अनुसार, खराब मौसम और आंधी-तूफान से अब तक करीब 90 लोगों की जान जाने की सूचना है, जबकि कई जिलों में जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। हालांकि, आधिकारिक पुष्टि और विस्तृत आंकड़ों का इंतजार किया जा रहा है।
मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि इस असामान्य बदलाव के पीछे पश्चिमी विक्षोभ की सक्रियता, नमी से भरी हवाएं और बदलते जलवायु पैटर्न प्रमुख कारण हो सकते हैं। लगातार हो रही बारिश और तेज हवाओं ने तापमान को सामान्य से काफी नीचे ला दिया है, जिससे लोगों को गर्मी से राहत तो मिली है, लेकिन साथ ही नुकसान भी बढ़ा है।
कई राज्यों में खेतों में खड़ी फसलें बर्बाद होने की खबरें हैं। गेहूं की कटाई के बाद खुले में रखी उपज को भी भारी नुकसान हुआ है। किसान संगठनों ने सरकार से राहत पैकेज और तत्काल मुआवजे की मांग की है।
वहीं शहरी इलाकों में बिजली आपूर्ति बाधित होने, पेड़ों के गिरने और ट्रैफिक व्यवस्था प्रभावित होने की घटनाएं सामने आई हैं। कई जगहों पर पानी भरने से सामान्य जनजीवन ठप पड़ गया है।
मौसम विभाग ने आने वाले कुछ दिनों तक उत्तर भारत के कई हिस्सों में इसी तरह के अस्थिर मौसम की चेतावनी जारी की है। विभाग ने लोगों से अपील की है कि वे खराब मौसम के दौरान घरों के अंदर रहें, पेड़ों और खुले मैदानों से दूर रहें और मौसम अपडेट पर नजर बनाए रखें।
विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन के प्रभाव अब अधिक स्पष्ट रूप से सामने आने लगे हैं। कभी अत्यधिक गर्मी, कभी अचानक बारिश और तूफान—यह सब मौसम के बदलते पैटर्न का संकेत हो सकता है।
फिलहाल, पूरे उत्तर भारत में मौसम को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। लोग हैरान हैं कि जिस मई में लू से राहत की उम्मीद नहीं होती थी, उसी महीने में छाता और रेनकोट ज़रूरी हो गए हैं।

