बड़ा प्रशासनिक फैसला: अरुणाचल सरकार ने मंत्रियों के विदेश दौरों पर 1 साल का प्रतिबंध लगाया, वीआईपी खर्चों में भी कटौती
राज्य के वित्तीय अनुशासन और सरकारी खर्चों में कटौती को लेकर अरुणाचल प्रदेश सरकार ने एक बड़ा और सख्त कदम उठाया है। सरकार ने मंत्रियों के सभी विदेशी दौरों पर एक साल के लिए प्रतिबंध लगा दिया है। इसके साथ ही मुख्यमंत्री और मंत्रियों के काफिले (वीआईपी काफिले) की संख्या भी आधी कर दी गई है।
सरकारी सूत्रों के अनुसार, यह निर्णय प्रशासनिक खर्चों में कमी लाने और राजकोषीय संतुलन बनाए रखने के उद्देश्य से लिया गया है। हाल के वर्षों में वीआईपी यात्रा, विदेश दौरे और सुरक्षा व्यवस्थाओं पर बढ़ते खर्च को देखते हुए सरकार पर वित्तीय दबाव बढ़ रहा था, जिसे नियंत्रित करने के लिए यह नीति लागू की गई है।
राज्य सरकार का मानना है कि विकास योजनाओं और जनकल्याणकारी परियोजनाओं पर अधिक बजट उपलब्ध कराने के लिए गैर-जरूरी खर्चों में कटौती आवश्यक है। इसी क्रम में यह निर्णय लिया गया है कि अब किसी भी मंत्री का विदेश दौरा अगले एक वर्ष तक अनुमति के बिना संभव नहीं होगा।
मुख्यमंत्री कार्यालय से जारी संकेतों के अनुसार, सरकारी वाहनों के काफिले को भी पुनर्गठित किया गया है। अब हर मंत्री के साथ कम संख्या में वाहन रहेंगे, जिससे ईंधन, सुरक्षा और लॉजिस्टिक खर्च में महत्वपूर्ण कमी आने की उम्मीद है।
इस फैसले को लेकर राजनीतिक हलकों में मिश्रित प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। सरकार समर्थकों का कहना है कि यह एक साहसिक और समयानुकूल निर्णय है, जो जनता के पैसे की बचत सुनिश्चित करेगा। वहीं विपक्ष ने इस कदम पर सवाल उठाते हुए कहा है कि विदेश दौरे कई बार राज्य के विकास और निवेश अवसरों के लिए महत्वपूर्ण होते हैं, ऐसे में पूर्ण प्रतिबंध उचित नहीं है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस नीति को प्रभावी ढंग से लागू किया गया, तो राज्य के बजट पर सकारात्मक असर पड़ सकता है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि विकास और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को प्रभावित न करने के लिए संतुलित दृष्टिकोण जरूरी होगा।
फिलहाल, सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह कदम अस्थायी है और इसकी समीक्षा एक वर्ष बाद की जाएगी। तब तक सभी मंत्री और अधिकारी नई व्यवस्था के तहत ही कार्य करेंगे।

