Samachar Nama
×

'यह मेरे लिए गर्व का पल है', लॉर्ड्स में ऐतिहासिक शतक लगाने पर बोलीं यास्तिका भाटिया

लंदन, 13 जुलाई (आईएएनएस)। इंग्लैंड महिला क्रिकेट टीम के खिलाफ खेले जा रहे एकमात्र टेस्ट मैच में यास्तिका भाटिया ने लॉर्ड्स के मैदान पर रविवार को शतक लगाकर इतिहास रचा। चोट के कारण एक साल टीम से बाहर रहने वाली यास्तिका ने अपनी इस उपलब्धि को सपने के सच होने जैसा बताया है।

लंदन, 13 जुलाई (आईएएनएस)। इंग्लैंड महिला क्रिकेट टीम के खिलाफ खेले जा रहे एकमात्र टेस्ट मैच में यास्तिका भाटिया ने लॉर्ड्स के मैदान पर रविवार को शतक लगाकर इतिहास रचा। चोट के कारण एक साल टीम से बाहर रहने वाली यास्तिका ने अपनी इस उपलब्धि को सपने के सच होने जैसा बताया है।

उन्होंने बताया कि इंग्लैंड के खिलाफ ऐतिहासिक महिला टेस्ट मैच में जब उन्होंने शतक पूरा किया, तो उन्हें अपनी वापसी के सफर की यादें और भावनाएं फिर से ताजा हो गईं। यास्तिका की 113 रनों की शानदार पारी ने न केवल लॉर्ड्स के ऑनर्स बोर्ड पर उनका नाम दर्ज कराया, बल्कि उन्हें इस ऐतिहासिक मैदान पर टेस्ट शतक लगाने वाली पहली महिला क्रिकेटर भी बनाया।

चोट के कारण जब यास्तिका लंबे समय तक खेल से दूर थीं और रिहैब कर रही थीं, उस दौरान उन्हें घरेलू वनडे वर्ल्ड कप और महिला प्रीमियर लीग (डब्ल्यूपीएल) जैसे बड़े टूर्नामेंट से भी दूर रहना पड़ा। बाएं हाथ की इस बल्लेबाज ने माना कि ऐसे पल भी आए जब ऐसी उपलब्धि नामुमकिन लगती थी।

बीसीसीआई द्वारा अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर शेयर किए गए वीडियो में यास्तिका ने कहा, "यह बहुत मुश्किल था। उस एक साल में मतलब मैं किसी भी बड़े टूर्नामेंट जैसे घरेलू वर्ल्ड कप और डब्ल्यूपीएल में नहीं खेल पाई। विश्व कप में खेलने का सपना हर कोई देखता है, लेकिन मैं उससे ठीक पहले चोटिल हो गई। इसके बाद महिला प्रीमियर लीग (डब्ल्यूपीएल) भी नहीं खेल पाई। वह दौर काफी मुश्किल था। हालांकि, बहुत से लोगों ने मेरा साथ दिया। टीम का साथ मिला और उस समय मेरे परिवार का सपोर्ट बहुत बड़ा था।"

उन्होंने आगे कहा, "इसी वजह से मैं उनकी बहुत आभारी हूं कि उन्होंने मुझे उस स्थिति से बाहर निकलने में मदद की। अगर कोई मुझसे छह महीने पहले पूछता कि क्या मेरा नाम लॉर्ड्स के ऑनर्स बोर्ड पर होगा, अगर कोई ऐसा कहता, तो मुझे खुद यकीन नहीं होता। मैं कहती, 'आप क्या बात कर रहे हैं?' यह सपने जैसा लगता है।"

यास्तिका ने माना कि यह यादगार पारी न केवल उनके लिए व्यक्तिगत वापसी का प्रतीक थी, बल्कि देश के लिए भी गर्व का पल था। शतक पूरा करने के पल को याद करते हुए, उन्होंने बताया कि शुरू में उन्होंने जश्न मनाने का कोई बड़ा तरीका सोचा था, लेकिन बाद में भावनाओं में बहकर उन्होंने सादा तरीका अपनाया।

“मैंने जश्न मनाने का प्लान बनाया था, लेकिन फिर सोचा, रहने देते हैं। इसे थोड़ा नॉर्मल ही रखते हैं। हालांकि, मैंने झंडे को चूमा; वह मेरे लिए बहुत गर्व का पल था। मैंने सैल्यूट करने का भी सोचा था, लेकिन उस पल मैं भूल गई। मैं भारत के लिए बहुत कुछ करना चाहती हूं, देश के लिए बहुत कुछ जीतना चाहती हूं, और वर्ल्ड कप भी जीतना चाहती हूं।"

भारतीय विकेटकीपर बल्लेबाज ने आगे कहा, "यह मेरे लिए बहुत खास पल था कि मैं अपना पहला टेस्ट शतक बना पाई और वह भी लॉर्ड्स में। इसके साथ ही हम टेस्ट मैच में इतनी अच्छी स्थिति में पहुंच गए हैं। जब मैंने अपना हेलमेट उतारा और ऐसा किया तो मैं थोड़ी भावुक भी हो गई। मुझे अपने परिवार के चेहरे याद आ रहे थे, और पिछला एक साल जिससे मैं गुजरी थी, वह सब मेरी आंखों के सामने घूम रहा था। कुल मिलाकर, यह एक शानदार पल था।"

--आईएएनएस

एसएम/पीएम

Share this story

Tags