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एशियन गेम्स में रूस, तुर्किये और इजराइल क्यों नहीं लेते हिस्सा? जानें इतिहास, राजनीति और खेल संस्थाओं का पूरा कनेक्शन

एशियन गेम्स में रूस, तुर्किये और इजराइल क्यों नहीं लेते हिस्सा? जानें इतिहास, राजनीति और खेल संस्थाओं का पूरा कनेक्शन

एशियन गेम्स को एशिया का ओलिंपिक कहा जाता है। इस प्रतियोगिता में एशिया के विभिन्न देशों के खिलाड़ी हिस्सा लेते हैं और कई खेलों में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करते हैं। लेकिन एशिया के भौगोलिक नक्शे पर मौजूद कुछ देश, जैसे रूस, तुर्किये और इजराइल, एशियन गेम्स में नियमित रूप से हिस्सा नहीं लेते। ऐसे में सवाल उठता है कि जब ये देश एशिया से जुड़े हुए हैं, तो फिर इन्हें एशियाई खेलों में शामिल क्यों नहीं किया जाता?

इस सवाल का जवाब केवल भूगोल से नहीं मिलता। किसी देश की एशियन गेम्स में भागीदारी का संबंध खेल संगठनों की सदस्यता, ऐतिहासिक परिस्थितियों, अंतरराष्ट्रीय संबंधों और राजनीतिक घटनाक्रम से भी होता है। रूस, तुर्किये और इजराइल का मामला इन सभी पहलुओं के कारण अलग-अलग है।

1. रूस: एशिया में जमीन, लेकिन यूरोपीय खेल व्यवस्था से जुड़ाव

रूस दुनिया के उन देशों में शामिल है, जिसका एक बड़ा भूभाग एशिया में और दूसरा यूरोप में स्थित है। इसके बावजूद रूस एशियन गेम्स में नियमित सदस्य देश के रूप में हिस्सा नहीं लेता। रूस की खेल संस्थागत संबद्धता यूरोपीय खेल व्यवस्था से जुड़ी रही है, जबकि एशियन गेम्स का आयोजन ओलंपिक काउंसिल ऑफ एशिया (OCA) के सदस्य राष्ट्रीय ओलंपिक समितियों के माध्यम से होता है।

2023 में रूस और बेलारूस के खिलाड़ियों को एशियन गेम्स में शामिल करने का प्रस्ताव सामने आया था। इसका उद्देश्य पेरिस ओलंपिक के लिए क्वालिफिकेशन का अवसर देना था। हालांकि, यह सामान्य सदस्यता के आधार पर रूस के एशियन गेम्स में शामिल होने के बराबर नहीं था। रूस की भागीदारी का सवाल उसकी खेल संस्थाओं और अंतरराष्ट्रीय खेल प्रतिबंधों से भी जुड़ा रहा है।

2. तुर्किये: दो महाद्वीपों में फैला देश

तुर्किये का भौगोलिक क्षेत्र यूरोप और एशिया दोनों में फैला हुआ है। देश का बड़ा हिस्सा एशिया में स्थित है, जबकि उसका एक हिस्सा यूरोप में आता है। इसके बावजूद तुर्किये एशियन गेम्स में शामिल नहीं होता।

इसका प्रमुख कारण देश की खेल संस्थागत संबद्धता है। तुर्किये यूरोपीय खेल संगठनों और यूरोपीय प्रतियोगिताओं से जुड़ा हुआ है। इसलिए किसी देश का एशिया में भूगोल के आधार पर मौजूद होना अपने आप उसे एशियन गेम्स का सदस्य नहीं बनाता। राष्ट्रीय ओलंपिक समिति की सदस्यता और संबंधित महाद्वीपीय खेल संगठन की व्यवस्था महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

3. इजराइल: राजनीतिक विवादों का लंबा इतिहास

इजराइल का मामला रूस और तुर्किये से अलग है। इजराइल ने अतीत में एशियन गेम्स में भाग लिया था। वह 1954 से 1974 तक इन खेलों में शामिल रहा। लेकिन पश्चिम एशिया के राजनीतिक विवादों और सुरक्षा संबंधी चिंताओं के बीच उसकी भागीदारी को लेकर लगातार समस्याएं सामने आईं।

1970 के दशक में इजराइल को एशियन गेम्स से बाहर रखने के फैसले हुए। 1981 में ओलंपिक काउंसिल ऑफ एशिया की स्थापना के समय इजराइल को संगठन से बाहर रखा गया। इसके बाद इजराइल एशियन गेम्स में भाग नहीं ले सका। बाद में वह यूरोपीय खेल संगठनों से जुड़ा और यूरोपीय प्रतियोगिताओं में भाग लेने लगा।

सिर्फ नक्शे से तय नहीं होती सदस्यता

एशियन गेम्स में भाग लेने के लिए किसी देश का एशिया में स्थित होना पर्याप्त नहीं है। ओलंपिक काउंसिल ऑफ एशिया की सदस्यता, राष्ट्रीय ओलंपिक समितियों की संबद्धता, ऐतिहासिक फैसले और राजनीतिक परिस्थितियां भी महत्वपूर्ण हैं।

रूस और तुर्किये का मामला मुख्य रूप से महाद्वीपीय खेल संस्थाओं से जुड़ी संबद्धता को समझने में मदद करता है, जबकि इजराइल का इतिहास राजनीतिक विवादों और संगठनात्मक निर्णयों से जुड़ा है। यही कारण है कि एशिया के नक्शे पर मौजूद हर देश एशियन गेम्स में हिस्सा नहीं लेता।

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