सुधा सिंह: स्टीपलचेज में दबदबा, एशियन गेम्स और एशियन चैंपियनशिप में देश को दिलाया पदक
नई दिल्ली, 24 जून (आईएएनएस)। सुधा सिंह भारत की एक बेहतरीन स्टीपलचेज एथलीट रही हैं। वह 3,000 मीटर स्टीपलचेज (बाधा दौड़) इवेंट में हिस्सा लेती थी। सुधा ने ओलंपिक में देश का प्रतिनिधित्व किया है। अपनी प्रतिभा, मेहनत और दृढ़ संकल्प के दम पर उन्होंने एशियन गेम्स और एशियन चैंपियनशिप में देश के लिए पदक जीते हैं।
सुधा सिंह का जन्म 25 जून 1986 को रायबरेली, उत्तर प्रदेश में हुआ था। सुधा ने 2005 से अंतरराष्ट्रीय मंचों पर देश का प्रतिनिधित्व करना शुरू किया था।
सुधा सिंह को सबसे बड़ी सफलता वर्ष 2010 में चीन के ग्वांगझू में आयोजित एशियाई खेलों में मिली, जहां उन्होंने 9:55.67 मिनट का समय निकालकर स्वर्ण पदक जीता। यह एशियाई खेलों में महिलाओं की 3000 मीटर स्टीपलचेज स्पर्धा का पहला आयोजन था और सुधा इस इवेंट की पहली एशियाई चैंपियन बनीं। इसके बाद उन्होंने 2017 की एशियाई एथलेटिक्स चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक तथा 2018 के जकार्ता एशियाई खेलों में रजत पदक जीतकर अपनी श्रेष्ठता साबित की।
वर्ष 2012 में सुधा ने अपना ही राष्ट्रीय रिकॉर्ड तोड़ते हुए 9:47.70 मिनट का समय निकाला और लंदन ओलंपिक के लिए क्वालिफाई किया। उन्होंने 2012 और 2016 के लगातार दो ओलंपिक खेलों में भारत का प्रतिनिधित्व किया। हालांकि, दोनों ओलंपिक में वह पदक जीतने में सफल नहीं रहीं, लेकिन उनकी भागीदारी भारतीय एथलेटिक्स के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि रही।
सुधा सिंह की उपलब्धियों पर गौर करें तो 2010 में ग्वांगझू में आयोजित एशियन गेम्स में स्वर्ण और 2018 में जकार्ता में आयोजित एशियन गेम्स में उन्होंने रजत पदक जीता था। 2017 में भुवनेश्वर में आयोजित एशियन चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीता था। इसके अलावा, 2009 में ग्वांगझू, 2011 में कोबे और 2013 में पुणे में आयोजित एशियन चैंपियनशिप में रजत पदक जीता था। इन सभी प्रतियोगिताओं में उन्होंने 3,000 मीटर स्टीपल चेज में हिस्सा लिया था।
उन्होंने 2022 में खेल को अलविदा कह दिया था। 2012 में सुधा सिंह को भारत सरकार ने अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया था। उन्हें 2021 में भारत के चौथे सबसे बड़े सिविलियन अवॉर्ड पद्मश्री से सम्मानित किया गया था।
--आईएएनएस
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