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'सबसे बेहतरीन और चुनौतीपूर्ण रेस 100 मीटर ब्रेस्टस्ट्रोक थी', कांस्य पदकों की हैट्रिक लगाने के बाद बोले हिमांशु नंदल

नागोया, 23 अक्टूबर (आईएएनएस)। एशियन पैरा गेम्स 2026 में पुरुषों की 100 मीटर बैकस्ट्रोक स्पर्धा में चौथे स्थान पर रहने से भारतीय पैरा-तैराक हिमांशु नंदल को इतनी निराशा हुई कि उन्हें खुद को आगे बढ़ने के लिए समझाना पड़ा। इस मानसिक बदलाव ने 22 वर्षीय खिलाड़ी को वापसी करने में मदद की, जिसके बाद उन्होंने जापान के आइची-नागोया में कांस्य पदकों की हैट्रिक पूरी की।

नागोया, 23 अक्टूबर (आईएएनएस)। एशियन पैरा गेम्स 2026 में पुरुषों की 100 मीटर बैकस्ट्रोक स्पर्धा में चौथे स्थान पर रहने से भारतीय पैरा-तैराक हिमांशु नंदल को इतनी निराशा हुई कि उन्हें खुद को आगे बढ़ने के लिए समझाना पड़ा। इस मानसिक बदलाव ने 22 वर्षीय खिलाड़ी को वापसी करने में मदद की, जिसके बाद उन्होंने जापान के आइची-नागोया में कांस्य पदकों की हैट्रिक पूरी की।

नंदल ने बताया कि इस नतीजे से उन्हें गहरा धक्का लगा था। उनके अभियान में अभी भी पांच इवेंट बाकी थे, इसलिए उन्होंने पीछे मुड़कर उस चूके हुए मौके के बारे में सोचने के बजाय आगे की ओर देखने का फैसला किया। हिमांशु नंदल ने 'आईएएनएस' को दिए एक इंटरव्यू में कहा, "100 मीटर बैकस्ट्रोक मेरे मुख्य इवेंट्स में से एक था और मैं पिछले दो वर्षों से इसका इंतजार कर रहा था। मैं 100 मीटर बैकस्ट्रोक में हिस्सा लेना चाहता था और अपना 'पर्सनल बेस्ट' (सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन) देना चाहता था, क्योंकि मैं इस इवेंट को लेकर बहुत जुनूनी हूं, हालांकि पता नहीं क्यों, उस दिन मेरा शरीर जैसे साथ ही नहीं दे रहा था। सब कुछ ठीक से नहीं हो पाया, मैं अपना 'पर्सनल बेस्ट' नहीं दे सका और उस दिन मुझे बहुत बुरा लगा।"

उन्होंने कहा, "हालांकि अगले दिन मैंने खुद को समझाने की कोशिश की और यह काम भी कर गया कि मुझे आगे के इवेंट्स पर ध्यान देना चाहिए, क्योंकि अभी पांच इवेंट बाकी थे। मन में कहीं न कहीं वह निराशा बनी रही, लेकिन मैंने अगले इवेंट्स के लिए और ज्यादा मेहनत की और अपना पूरा ध्यान इस बात पर लगाया कि आगे क्या करना है।"

फोकस बदलने का उन्हें अच्छा फल मिला और नंदल ने पुरुषों की 400 मीटर फ्रीस्टाइल एस11, 100 मीटर ब्रेस्टस्ट्रोक एस11 और 100 मीटर फ्रीस्टाइल एस11 स्पर्धाओं में कांस्य पदक जीते। इसके साथ ही, वह इन खेलों में भारत के सबसे बेहतरीन पैरा-तैराकों में से एक बनकर उभरे। उनका आखिरी मेडल शुक्रवार को 100 मीटर फ्रीस्टाइल इवेंट में आया, जहां वह 1 मिनट 5.90 सेकंड के समय के साथ तीसरे स्थान पर रहे। इस रेस में जापान के उचु टोमिता ने 58.22 सेकंड के गेम्स-रिकॉर्ड समय के साथ गोल्ड जीता, जबकि चीन के चुआनझेन सन ने 58.70 सेकंड के समय के साथ सिल्वर मेडल हासिल किया।

नंदल ने अपने मेडल जीतने का सिलसिला मंगलवार को 400 मीटर फ्रीस्टाइल में 5:10.91 के समय के साथ शुरू किया था, और इसके बाद उन्होंने 100 मीटर ब्रेस्टस्ट्रोक में एक और ब्रॉन्ज मेडल जीता। अपने तीन पोडियम फिनिश (मेडल जीतने वाले प्रदर्शन) को याद करते हुए उन्होंने बताया कि ब्रेस्टस्ट्रोक सबसे चुनौतीपूर्ण रेस थी, क्योंकि ब्रॉन्ज मेडल जीतने वाले और चौथे स्थान पर रहने वाले खिलाड़ी के बीच का अंतर बहुत ही कम था।

उन्होंने कहा, "मेरे हिसाब से सबसे बेहतरीन और चुनौतीपूर्ण रेस 100 मीटर ब्रेस्टस्ट्रोक थी, क्योंकि ब्रॉन्ज और चौथे स्थान के बीच का अंतर बहुत कम था। बस कुछ माइक्रो सेकंड का, मानो बाल-बाल का फासला हो। 400 मीटर फ्रीस्टाइल भी चुनौतीपूर्ण थी, क्योंकि मैं पहले दिन की निराशा से उबरने की कोशिश कर रहा था और मुझे अच्छा प्रदर्शन करना ही था। हां, ऐसा ही हुआ। अब तक मेरे पास तीन मेडल हैं, और तीनों ही ब्रॉन्ज मेडल हैं।"

नंदल के लिए ये तीन मेडल जापान में बिताए गए एक अच्छे हफ्ते से कहीं बढ़कर हैं। यह उनके उस खेल सफर का एक और अहम कदम है, जिसकी शुरुआत जूडो से हुई थी। 2021 में वे तैराकी (स्विमिंग) की ओर मुड़े, और इसी सफर के चलते वह अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचे और एक महत्वपूर्ण क्वालिफिकेशन हासिल किया।

ऑप्टिक नर्व फेल होने के कारण जन्म से ही आंखों से दिव्यांग नंदल हरियाणा के रोहतक में एक ऐसे परिवार में पले-बढ़े, जिसका खेलों से गहरा नाता था। उनके पिता राष्ट्रीय स्तर पर हॉकी खेल चुके थे, इसलिए बचपन से ही खेल उनके जीवन का अहम हिस्सा बन गए थे। चार साल की उम्र में वह दिल्ली आ गए और 'नेशनल एसोसिएशन फॉर द ब्लाइंड' से जुड़े, जहां उन्होंने ब्रेल लिपि सीखी।

शुरुआत में उन्होंने जूडो में हिस्सा लिया और राष्ट्रीय स्तर पर पदक भी जीते, लेकिन बाद में वे तैराकी की ओर मुड़ गए। उन्होंने बताया कि ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि तैराकी में उनकी रुचि बढ़ती गई और तैराकी के कोचों ने भी उन्हें प्रोत्साहित किया, क्योंकि उन्हें लगा कि नंदल पूल में बहुत अच्छा प्रदर्शन कर सकते हैं।

उन्होंने कहा, "जूडो छोड़ने के बाद मेरी रुचि तैराकी में काफी बढ़ गई थी। मेरे पिता को तैराकी के कोचों से सुझाव मिल रहे थे कि मुझे तैराकी में हाथ आजमाना चाहिए। उन्होंने पानी में मेरी क्षमता को परखा और कहा कि मैं तैराकी में अच्छा कर सकता हूं।" हालांकि इस बदलाव के साथ कुछ चुनौतियां भी आईं। नंदल बताते हैं कि इस दौरान उन्हें कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ा, जिसमें पानी से होने वाली एलर्जी भी शामिल थी। इस नए खेल में खुद को स्थापित करने के दौरान यह एक बड़ी समस्या बन गई थी।

समय के साथ उनकी प्रगति और तेज होती गई। 2024 में वह पेरिस पैरालंपिक के लिए 'मिनिमम क्वालिफिकेशन स्टैंडर्ड' (न्यूनतम योग्यता मानक) हासिल करने वाले पहले भारतीय दृष्टिहीन तैराक बने। इसके बाद उन्होंने और अधिक अंतरराष्ट्रीय अनुभव हासिल किया और सिंगापुर में आयोजित 2025 वर्ल्ड पैरा स्विमिंग चैंपियनशिप में दो फाइनल तक पहुंचे।

दिल्ली विश्वविद्यालय के आत्माराम सनातन धर्म कॉलेज से राजनीति विज्ञान में स्नातक करने वाले नंदल अब 'स्पोर्ट्स मैनेजमेंट' (खेल प्रबंधन) में आगे की पढ़ाई करने के बारे में सोच रहे हैं। वह अपनी शैक्षणिक रुचियों को उस खेल के साथ जोड़ना चाहते हैं, जो उनके जीवन का एक बड़ा हिस्सा रहा है। उन्होंने कहा, "मैं स्पोर्ट्स मैनेजमेंट के बारे में सोच रहा हूं, क्योंकि खेलों से जुड़ी पढ़ाई करना दिलचस्प होगा, खासकर इसलिए क्योंकि मैं खुद भी व्यावहारिक रूप से खेलों से जुड़ा हुआ हूँ। इसी वजह से दोनों तरह से इसे करना मजेदार रहेगा।"

दृष्टिहीन तैराकों के लिए बने 'एस11' क्लासिफिकेशन में हिस्सा लेने वाले नंदल, अन्य तैराकों की तरह ही अपना ट्रेनिंग रूटीन फॉलो करते हैं। बस, उन्हें पूल में सुरक्षित रूप से आगे बढ़ने और अपनी दिशा (लाइन) बनाए रखने के लिए कुछ अतिरिक्त मदद दी जाती है। उन्होंने बताया, “ट्रेनिंग काफी हद तक सामान्य ही होती है, बस फर्क इतना है कि पूल के दोनों तरफ दो ‘टैपर’ (संकेत देने वाले) खड़े होते हैं। अगर दो टैपर उपलब्ध न हों, तो एक ही टैपर को लगभग चार किलोमीटर तक, या जब तक वर्कआउट चलता है, साथ-साथ चलना पड़ता है। चूंकि हम देख नहीं सकते, इसलिए हमें लेन की लाइनों के सहारे आगे बढ़ना पड़ता है। हम हर तीसरे या चौथे स्ट्रोक के बाद इन लाइनों को छूते हुए चलते हैं। बस यही मुख्य अंतर है, बाकी सब कुछ लगभग वैसा ही है।”

भारत के प्रमुख पैरा-स्विमर्स में अपनी जगह बनाने के बाद, नंदल अब अपनी टाइमिंग सुधारने पर ध्यान दे रहे हैं। उनका मानना ​​है कि लगातार हो रही प्रगति उन्हें पोडियम के शीर्ष (जीत) के और करीब ले जाएगी। उन्होंने कहा, “मेरा अगला बड़ा लक्ष्य अपने ही ‘पर्सनल बेस्ट’ (अब तक के सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन) को पीछे छोड़ना है। मैं बस उसे बेहतर करना चाहता हूं। अगर मैं लगातार अपने पर्सनल बेस्ट को बेहतर करता रहूंगा, तो मैं गोल्ड मेडल के और करीब पहुंच जाऊंगा।”

--आईएएनएस

एसएम/वीसी

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