Samachar Nama
×

पिछली बार हम गोल्ड चूके थे, इसकी बहुत चाहत थी: एमआर पूवम्मा

नागोया, 29 सितंबर (आईएएनएस)। एशियन गेम्स 2026 में तिरंगा लहराने के बाद एमआर पूवम्मा ने बताया कि पिछली एशियन गेम्स में महिलाओं की 4x400 मीटर रिले में बहुत कम अंतर से गोल्ड मेडल चूकने की टीस टीम के मन में थी।

नागोया, 29 सितंबर (आईएएनएस)। एशियन गेम्स 2026 में तिरंगा लहराने के बाद एमआर पूवम्मा ने बताया कि पिछली एशियन गेम्स में महिलाओं की 4x400 मीटर रिले में बहुत कम अंतर से गोल्ड मेडल चूकने की टीस टीम के मन में थी।

भारत के लिए दूसरी लेग दौड़ने वाली 36 वर्षीय पूवम्मा ने कहा कि टीम पिछली बार की निराशा को गोल्ड मेडल में बदलने और जीत के बाद राष्ट्रगान सुनने के पल का आनंद लेने के लिए दृढ़ संकल्पित थी।

गोल्ड जीतने के बाद पूवम्मा ने 'आईएएनएस' से ​​कहा, "बहुत गर्व महसूस हो रहा है, क्योंकि हमें इस गोल्ड मेडल की बहुत चाहत थी। महिलाओं की 4x400 मीटर टीम भी इसे बहुत चाहती थी क्योंकि पिछले एशियन गेम्स में हम बहुत कम अंतर से इसे चूक गए थे। हम उस बात को ध्यान में रखना चाहते थे, इसलिए हमने गोल्ड मेडल जीता। हमने राष्ट्रगान सुना और हम सभी को बहुत गर्व है।"

किरण पहल, पूवम्मा, प्राची चौधरी और विथ्या रामराज ने 3:29.69 का समय लेकर महिलाओं की 4x400 मीटर रिले जीती। बहरीन (3:30.21) और चीन (3:31.02) ने क्रमश: सिल्वर और ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम किए।

यह जीत एशियन गेम्स में महिलाओं की 4x400 मीटर रिले में भारत का पहला गोल्ड मेडल था और इसने पिछले खेलों में जीते गए सिल्वर मेडल से बेहतर प्रदर्शन किया।

भारतीय एथलेटिक्स की अनुभवी खिलाड़ी पूवम्मा ने युवा पीढ़ी के लिए भी एक संदेश दिया और उनसे चोटों, असफलताओं या उम्र की परवाह किए बिना प्रतिबद्ध रहने का आग्रह करते हुए कहा, "मैं बस उनसे यही कहना चाहती हूं कि चाहे कुछ भी हो, कड़ी मेहनत करते रहें। उम्र सिर्फ एक आंकड़ा है; यह कोई बाधा नहीं है। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। कड़ी मेहनत करते रहें; यही मायने रखता है। चाहे चोटें हों या कुछ और, अगर आप अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पा रहे हैं, तब भी कड़ी मेहनत करते रहें और आगे बढ़ते रहें। निश्चित रूप से, कड़ी मेहनत का फल जरूर मिलता है।"

इस अनुभवी एथलीट ने खेलो इंडिया प्रोग्राम, स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (साई), एथलेटिक्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एफआई) और सरकार से भारतीय एथलीट्स को मिले सहयोग को भी माना। उन्होंने कहा, "उन्होंने बहुत अच्छा सहयोग दिया है। खेलो इंडिया, साई और एएफआई; इनसे मिला सहयोग बहुत अहम रहा है। हमारा पोलैंड में एक ट्रेनिंग कैंप था, जो बहुत फायदेमंद रहा, फिर चेक रिपब्लिक में और टोक्यो में भी हमारा एक हफ्ते का कैंप था। सब कुछ बहुत मददगार रहा और यही मायने रखता है। हमने गोल्ड मेडल जीता है।"

पूवम्मा ने बताया कि जीत के बाद उन्होंने अपने परिवार से बात की और अब वह घर लौटने का बेसब्री से इंतजार कर रही हैं। उन्होंने कहा, "मैंने अपने माता-पिता, पति और भाई से बात की, सब बहुत खुश हैं। अभी मैंने कोई योजना नहीं बनाई है। मैं बस घर पहुंचकर अपने बच्चे से मिलना चाहती हूं। छह-सात महीने हो गए हैं। मेरी एक भतीजी है और मैं उससे मिलने के लिए बहुत बेताब हूं, इसलिए मैं उससे मिलने का इंतजार कर रही हूं।"

पूवम्मा ने यह मेडल अपने परिवार और उन सभी लोगों को समर्पित करते हुए कहा, "हमेशा अपने देश के लिए, लेकिन खासतौर पर अपने माता-पिता, पति, एफआई, साई, सरकार और उन सभी लोगों के लिए जिन्होंने मेरा साथ दिया।"

--आईएएनएस

आरएसजी

Share this story

Tags