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फोनबेट विवाद के बीच इटली के कोच बनने की दौड़ से बाहर हुए एंड्रिया पिर्लो

नई दिल्ली, 27 जुलाई (आईएएनएस)। इटली के पूर्व अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी एंड्रिया पिर्लो ने पुष्टि की है कि वे अब इटली की नेशनल टीम के कोच बनने की दौड़ में शामिल नहीं हैं। रूसी सट्टेबाजी कंपनी 'फोनबेट' के साथ उनके कमर्शियल जुड़ाव की आलोचना और उनकी संभावित नियुक्ति के विरोध के बाद यह फैसला लिया गया।

नई दिल्ली, 27 जुलाई (आईएएनएस)। इटली के पूर्व अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी एंड्रिया पिर्लो ने पुष्टि की है कि वे अब इटली की नेशनल टीम के कोच बनने की दौड़ में शामिल नहीं हैं। रूसी सट्टेबाजी कंपनी 'फोनबेट' के साथ उनके कमर्शियल जुड़ाव की आलोचना और उनकी संभावित नियुक्ति के विरोध के बाद यह फैसला लिया गया।

रिपोर्ट्स के अनुसार, पेप गार्डियोला के इस भूमिका को ठुकराने के बाद 47 वर्षीय वर्ल्ड कप विजेता पिर्लो, जेनारो गैटुसो की जगह लेने के लिए मुख्य उम्मीदवारों में से एक बन गए थे। हालांकि, रूसी सट्टेबाजी कंपनी 'फोनबेट' के ग्लोबल एंबेसडर के तौर पर उनकी भूमिका के कारण पिर्लो की उम्मीदवारी पर गंभीर सवाल उठाए गए। इससे इटैलियन फुटबॉल फेडरेशन (एफआईजीसी) के अधिकारियों और कई इटैलियन सांसदों ने आपत्ति जताई।

सोमवार को अपनी चुप्पी तोड़ते हुए पिर्लो ने बताया कि उन्हें पिछली रात ही सूचित कर दिया गया था कि अब इस पद के लिए उन पर विचार नहीं किया जा रहा है। साथ ही, उन्होंने अपने पेशेवर रवैये का बचाव भी किया।

पिर्लो ने इंस्टाग्राम पर लिखा, "कल रात यह जानने के बाद कि मैं अब इटली की नेशनल टीम का नेतृत्व करने के लिए उम्मीदवार नहीं हूं, कुछ बातों को स्पष्ट करना मेरा कर्तव्य है। पिछले कुछ दिनों में, मैंने अपने नाम और इटली की नेशनल टीम के हेड कोच की भूमिका संभालने की संभावना को लेकर हुई बहस को बहुत दुख के साथ देखा है।"

पूर्व मिडफील्डर, जो अभी दुबई की यूएई प्रो लीग में यूनाइटेड एफसी के मैनेजर हैं, ने जोर देकर कहा कि अपने खिलाड़ी और कोच के करियर के दौरान उन्होंने हमेशा कानून के दायरे में रहकर काम किया है। उन्होंने कहा, "अपने पूरे करियर में, पहले एक खिलाड़ी के तौर पर और अब एक कोच के तौर पर, मैंने हमेशा उन देशों के कानूनों और साइन किए गए कॉन्ट्रैक्ट्स का पूरी तरह पालन करते हुए अपना काम किया है, जहां मैंने काम किया है। पिर्लो ने अक्टूबर में फोनबेट के साथ एंबेसडर के तौर पर एक एग्रीमेंट साइन किया था और कहा था कि यह पार्टनरशिप पूरी तरह से कमर्शियल और खेल से जुड़ी थी। उस सहयोग को राजनीतिक रंग देना मुझ पर ऐसी सोच थोपने जैसा है जिसे मैंने कभी जाहिर नहीं किया और जो मेरी सोच से मेल नहीं खाती।"

पिर्लो से जुड़ा विवाद तब और बढ़ गया जब वे इटली के अपने पूर्व साथी खिलाड़ी मार्को माटेराजी के साथ मॉस्को के लुझनिकी स्टेडियम में फोनबेट द्वारा आयोजित एक इवेंट में शामिल हुए। यूक्रेन में रूस के जारी युद्ध के बीच इस घटना की काफी आलोचना हुई।

पिर्लो को इटली में रूस के राजदूत एलेक्सी पैरामो नोव का भी सार्वजनिक समर्थन मिला, जिन्होंने कंपनी के साथ पिर्लो के जुड़ाव पर हो रही आलोचना की निंदा की। फेसबुक पर पिर्लो को लिखे एक पत्र में पैरामो नोव ने कहा, "यह देखकर दुख होता है कि दुनिया भर के खेलों और विदेशों में इटली की छवि को बेहतर बनाने में आपके असाधारण योगदान के बावजूद, अब आपको अपने ही देश में उस सिस्टम द्वारा अलग-थलग किया जा रहा है।"

अब जबकि पिर्लो दौड़ से बाहर हो चुके हैं, इटली के अगले हेड कोच की तलाश जारी है। इटैलियन फुटबॉल महासंघ (एफआईजीसी) के तकनीकी निदेशक पाओलो माल्डिनी, जिन्होंने इसी महीने यह जिम्मेदारी संभाली है, नए कोच की नियुक्ति की प्रक्रिया का नेतृत्व कर रहे हैं। पूर्व एसी मिलान और इटली के दिग्गज डिफेंडर माल्डिनी ऐसे कोच की तलाश में हैं, जो चार बार की विश्व चैंपियन टीम को फीफा विश्व कप 2030 के लिए क्वालीफाई करा सके। इटली लगातार पिछले तीन विश्व कप संस्करणों में जगह बनाने में नाकाम रहा है, इसलिए टीम को फिर से वैश्विक मंच पर लौटाना नए कोच की सबसे बड़ी चुनौती होगी।

--आईएएनएस

आरएसजी

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