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पहले की तुलना में देश में खेल संस्कृति बढ़ी है: साक्षी चौधरी

नई दिल्ली, 16 अगस्त (आईएएनएस)। ग्लासगो में आयोजित कॉमनवेल्थ गेम्स में मुक्केबाजी में स्वर्ण पदक जीतने वाली मुक्केबाज साक्षी चौधरी ने कहा है कि देश में खेल की संस्कृति पहले की तुलना में बढ़ी और मजबूत हुई है।

नई दिल्ली, 16 अगस्त (आईएएनएस)। ग्लासगो में आयोजित कॉमनवेल्थ गेम्स में मुक्केबाजी में स्वर्ण पदक जीतने वाली मुक्केबाज साक्षी चौधरी ने कहा है कि देश में खेल की संस्कृति पहले की तुलना में बढ़ी और मजबूत हुई है।

साक्षी चौधरी ने आईएएनएस से बात करते हुए कहा, "मैं कहूंगी कि हमारे देश में खेल संस्कृति पहले के मुकाबले काफी बढ़ी है। अहमदाबाद में आने वाले 2030 कॉमनवेल्थ गेम्स होने से यहां के युवा और भी ज्यादा प्रेरित और जागरूक होंगे। इसके अलावा, 2036 ओलंपिक में भारत के लिए ज्यादा पदक हासिल करने का जो लक्ष्य तय किया गया है, वो सरकार की एक बेहतरीन और प्रशंसनीय पहल है। खेल बजट भी पहले से काफी बढ़ा है। इससे हमें सच में एक जीवंत खेल संस्कृति बनाने में मदद मिलेगी।"

साक्षी ने कॉमनवेल्थ गेम्स में महिलाओं की 51 किग्रा बॉक्सिंग कैटेगरी में जबरदस्त प्रदर्शन किया और फाइनल में इंग्लैंड की रूबी व्हाइट को 5-0 से हराकर स्वर्ण पदक जीता था। पूरी प्रतियोगिता के दौरान वह अजेय रही और प्री-क्वार्टर फाइनल से लेकर फाइनल तक 5-0 के सर्वसम्मत फैसले का रिकॉर्ड बनाए रखा। ग्लासगो में उनके गोल्ड मेडल जीतने वाले प्रदर्शन में तेज मूवमेंट, संयमित डिफेंस, सटीक कॉम्बिनेशन और समझदारी भरी रणनीतिक चालें शामिल थीं।

कॉमनवेल्थ गेम्स में स्वर्ण पदक जीतने के बाद साक्षी ने कहा था कि मैं अपने देश के लिए खेलती हूं। यह लगातार मन में रहने वाला विचार मुझे जोश से भर देता है और मुझे पिछले मैच से बेहतर करने की ताकत और हिम्मत देता है। स्वर्ण पदक जीतना मेरे लिए एक सपने के सच होने जैसा है। अब मेरा पूरा ध्यान एशियाई खेलों पर है। ये ऐसे मंच हैं, जिन पर खेलने का मैंने हमेशा लक्ष्य रखा है, और मैं अपनी पूरी क्षमता के साथ खेलना चाहती हूं।

उन्होंने कहा था कि कॉमनवेल्थ मैचों से मैंने बहुत कुछ सीखा है, और मैं इस अनुभव को हमेशा याद रखूंगी। साथ ही, इसका उपयोग एशियाई खेलों में करूंगी।

--आईएएनएस

पीएके

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