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पैरा एशियन गेम्स से बड़ी खबर: मोना अग्रवाल और अवनी लेखरा ने देश को दिलाया गोल्ड और सिल्वर मेडल

पैरा एशियन गेम्स से बड़ी खबर: मोना अग्रवाल और अवनी लेखरा ने देश को दिलाया गोल्ड और सिल्वर मेडल

पैरा एशियन गेम्स में भारतीय खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए पहले ही दिन देश का गौरव बढ़ा दिया। सोमवार को भारत की पैरा-शूटर मोना अग्रवाल ने गोल्ड मेडल अपने नाम किया, जबकि अवनी लेखरा ने सिल्वर मेडल जीतकर भारत की झोली में एक और पदक डाल दिया। वहीं, जूडो खिलाड़ी कपिल परमार ने ब्रॉन्ज मेडल जीतकर भारत की पदक तालिका में योगदान दिया।

जापान के नागोया में आयोजित हो रहे इन खेलों में मोना और अवनी ने महिलाओं की R2 10 मीटर एयर राइफल SH1 कैटेगरी में शानदार निशानेबाजी की। मोना ने 250.0 अंक हासिल करके स्वर्ण पदक जीता, जबकि अवनी 249.6 अंकों के साथ दूसरे स्थान पर रहीं। दक्षिण कोरिया की युनरी ली ने 227.9 अंक हासिल कर कांस्य पदक जीता।

आखिरी शॉट तक चला मोना और अवनी के बीच कड़ा मुकाबला

मोना अग्रवाल और अवनी लेखरा के बीच गोल्ड मेडल के लिए जबरदस्त टक्कर देखने को मिली। 24 शॉट के फाइनल में दोनों खिलाड़ियों ने आखिरी क्षण तक एक-दूसरे को कड़ी चुनौती दी। निर्णायक शॉट से पहले मुकाबला बेहद रोमांचक स्थिति में था और दोनों के बीच अंतर बेहद कम रह गया था।

अंतिम शॉट में मोना ने 10.8 अंक हासिल किए, जबकि अवनी को 10.5 अंक मिले। इसी के साथ मोना ने गोल्ड मेडल पर कब्जा जमाया और अवनी को सिल्वर से संतोष करना पड़ा। दोनों खिलाड़ियों का यह प्रदर्शन भारतीय पैरा-शूटिंग की ताकत को दर्शाता है।

अवनी के सिल्वर मेडल के साथ भारत को 2028 लॉस एंजिल्स पैरालंपिक्स के लिए दूसरा कोटा स्थान मिलने की जानकारी सामने आई है। इससे पहले मोना अग्रवाल ने दक्षिण कोरिया में आयोजित वर्ल्ड शूटिंग पैरा स्पोर्ट चैंपियनशिप में सिल्वर मेडल जीतकर भारत के लिए पहला कोटा स्थान हासिल किया था।

पोलियो से जूझीं, फिर दुनिया में बनाई पहचान

राजस्थान की रहने वाली मोना अग्रवाल की सफलता की कहानी संघर्ष और दृढ़ संकल्प की मिसाल है। उनका जन्म 8 नवंबर 1987 को हुआ था। महज नौ महीने की उम्र में उन्हें पोलियो हो गया था, जिसके कारण उनके दोनों पैर प्रभावित हुए।

हालांकि, शारीरिक चुनौतियां उनके हौसले को कमजोर नहीं कर सकीं। शूटिंग में आने से पहले मोना पैरा-एथलेटिक्स और पैरा-पावरलिफ्टिंग जैसे खेलों में भी हिस्सा ले चुकी थीं। इसके अलावा उन्होंने सिटिंग वॉलीबॉल में भी अपनी प्रतिभा दिखाई और राजस्थान की महिला टीम की कप्तानी की।

साल 2019 में उनकी कप्तानी में राजस्थान की महिला टीम ने पहली नेशनल सिटिंग वॉलीबॉल चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीता था। इसके बाद दिसंबर 2021 में उन्होंने राइफल शूटिंग की शुरुआत की और 2022 में राष्ट्रीय स्तर पर सिल्वर मेडल हासिल किया।

साल 2023 में मोना ने क्रोएशिया के ओसिजेक में आयोजित वर्ल्ड कप के मिक्स्ड टीम इवेंट में ब्रॉन्ज मेडल जीता। इसी वर्ष चांगवोन में हुए वर्ल्ड कप में महिलाओं की 10 मीटर एयर राइफल SH1 स्पर्धा में गोल्ड मेडल हासिल किया।

मार्च 2024 में नई दिल्ली में आयोजित वर्ल्ड शूटिंग पैरा स्पोर्ट वर्ल्ड कप में भी मोना ने स्वर्ण पदक जीता। उन्होंने 250.7 अंक हासिल कर एशियाई रिकॉर्ड बनाया और पेरिस पैरालंपिक्स के लिए भारत को कोटा स्थान दिलाया। इसके बाद पेरिस 2024 पैरालंपिक खेलों में उन्होंने महिलाओं की 10 मीटर एयर राइफल SH1 स्पर्धा में ब्रॉन्ज मेडल जीतकर देश का नाम रोशन किया। उनके शानदार योगदान के लिए उन्हें 2024 में अर्जुन पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया।

हादसे के बाद अवनी लेखरा ने बदली अपनी जिंदगी

अवनी लेखरा भी उन खिलाड़ियों में शामिल हैं, जिन्होंने कठिन परिस्थितियों को अपनी कमजोरी नहीं, बल्कि ताकत बनाया। साल 2012 में एक कार दुर्घटना में उनकी रीढ़ की हड्डी में चोट लग गई थी। उस समय उनकी उम्र महज 10 साल थी।

इस मुश्किल दौर में उनके पिता ने उन्हें खेलों से जुड़ने के लिए प्रेरित किया। अवनी ने दिग्गज निशानेबाज अभिनव बिंद्रा की आत्मकथा 'ए शॉट एट हिस्ट्री' से प्रेरित होकर 2015 में शूटिंग शुरू की।

शूटिंग ने न केवल उन्हें खेल के क्षेत्र में आगे बढ़ने का अवसर दिया, बल्कि उनका आत्मविश्वास बढ़ाने में भी मदद की। धीरे-धीरे उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई और भारत की प्रमुख पैरा-शूटरों में जगह हासिल की। अवनी ने राजस्थान यूनिवर्सिटी से पांच वर्षीय लॉ डिग्री की पढ़ाई भी की है।

पैरा एशियन गेम्स में सिल्वर मेडल जीतकर अवनी ने एक बार फिर साबित किया कि लगातार मेहनत और मजबूत इच्छाशक्ति के दम पर बड़ी से बड़ी चुनौती का सामना किया जा सकता है।

कपिल परमार ने जूडो में जीता कांस्य पदक

शूटिंग के अलावा जूडो में भी भारत को सफलता मिली। मध्य प्रदेश के सीहोर के रहने वाले कपिल परमार ने पुरुषों की J1 कैटेगरी के 70 किलोग्राम भार वर्ग में ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम किया।

कपिल ने कांस्य पदक के मुकाबले में इंडोनेशिया के हनाफ रफली शिदकी को इप्पोन के जरिए हराया। इससे पहले वह सेमीफाइनल में इंडोनेशिया के जुनेदी से 0-1 से हार गए थे, जिसके बाद उन्हें ब्रॉन्ज मेडल के लिए मुकाबला करना पड़ा।

J1 कैटेगरी में गंभीर दृष्टिबाधिता वाले खिलाड़ी हिस्सा लेते हैं। इसमें ऐसे खिलाड़ी शामिल होते हैं, जिनकी दृष्टि बेहद सीमित होती है या जो पूरी तरह दृष्टिहीन होते हैं।

भारतीय खिलाड़ियों के प्रदर्शन से बढ़ी पदक की उम्मीदें

पैरा एशियन गेम्स के पहले दिन मोना अग्रवाल के गोल्ड, अवनी लेखरा के सिल्वर और कपिल परमार के ब्रॉन्ज मेडल ने भारतीय दल को शानदार शुरुआत दिलाई है। इन खिलाड़ियों की उपलब्धियां उनकी मेहनत, अनुशासन और संघर्ष की कहानी बयां करती हैं।

मोना और अवनी की निशानेबाजी में सफलता तथा कपिल का जूडो में शानदार प्रदर्शन भारतीय पैरा-खेलों की बढ़ती ताकत को दिखाता है। अब सभी की निगाहें प्रतियोगिता के अगले मुकाबलों पर हैं, जहां भारतीय खिलाड़ियों से और पदक जीतने की उम्मीद की जा रही है।

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